देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के बीच रावत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि यात्रा में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आम लोग शामिल हुए हैं, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है।

हरीश रावत ने कहा कि दिनभर चली यात्रा में दूर-दराज के गांवों से हजारों कांग्रेसजन पहुंचे। ऐसे बुजुर्ग लोग भी उनसे मिलने आए, जो अब सक्रिय राजनीति और सामाजिक जीवन से दूर हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के अधिकांश प्रमुख नेता और कार्यकर्ता भी यात्रा में किसी न किसी रूप में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में उनकी यात्रा को लेकर गलतफहमी पैदा हो रही है। रावत के मुताबिक, उन्होंने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात कर पूरी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी की ओर से कोई समन्वित कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है तो वह अपनी आगे की प्रस्तावित 8-10 यात्राओं को स्थगित करने के लिए तैयार हैं।
रावत ने कहा कि मौजूदा यात्रा पहले से निर्धारित थी और इसे अचानक स्थगित करने से सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल पर विपरीत असर पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि संभव है कि वह अपनी बात पार्टी नेतृत्व तक ठीक तरह से नहीं पहुंचा पाए हों। उन्होंने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा से भी उनकी 7 अक्टूबर की शाम 7 बजे मुलाकात निर्धारित है और पार्टी को स्पष्टीकरण मांगने का पूरा अधिकार है।
हालांकि, रावत ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस की ओर से इस समय कोई बड़ा संगठित जनसंपर्क अभियान नहीं चल रहा है तो उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा से पार्टी के कार्यक्रमों में कमजोरी कैसे आ रही है? उन्होंने कहा कि जिलों, ब्लॉकों, सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से कोई व्यापक संगठित जनसंपर्क अभियान दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में उनकी यात्रा कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संवाद और उनका मनोबल बढ़ाने का माध्यम है।
रावत के इस बयान को उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर संगठन, नेतृत्व और आगामी मिशन-2027 की रणनीति को लेकर चल रही खींचतान के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


