हरिद्वार, 26 सितंबर।सोनी रोड़।उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने संस्कृत को नई तकनीक, शोध और नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया। समारोह में राज्यपाल ने 32 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और छह विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की।

राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत को केवल अतीत की धरोहर के रूप में संरक्षित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने की आवश्यकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, भाषा-विज्ञान और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना और समृद्ध साहित्य के आधार पर व्यापक शोध की संभावनाएं हैं। उन्होंने संस्कृत को डिजिटल संसार, शोध प्रयोगशालाओं और वैश्विक ज्ञान-विमर्श से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-चेतना, चिंतन परंपरा और सांस्कृतिक स्मृति की प्रमुख वाहक है। विद्यार्थियों से ज्ञान, संस्कार और युवा ऊर्जा को समाज एवं राष्ट्र निर्माण में लगाने का आह्वान करते हुए उन्होंने निरंतर ज्ञानवृद्धि, समाजसेवा, नवाचार और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
समारोह में राज्यपाल ने लोक गायिका पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल सहित डॉ. अनुसूया प्रसाद पंत, प्रो. राम कुमार शर्मा और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को मानद उपाधियों से सम्मानित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया।
राज्यपाल ने पद्मश्री अभिराज राजेन्द्र मिश्र द्वारा विश्वविद्यालय को करीब 10 हजार दुर्लभ पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं के दान के लिए आभार जताया। इन ग्रंथों को ‘अभिराज-पुस्तक-वीथी’ के रूप में संरक्षित किया जाएगा। समारोह की विशेष बात यह रही कि राज्यपाल ने अपना संबोधन संस्कृत भाषा में दिया।
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने संस्कृत को वैज्ञानिक और कंप्यूटर अनुकूल भाषा बताते हुए विश्वविद्यालय में पारंपरिक विषयों के साथ शिक्षा शास्त्र, योग और बहुशास्त्रीय शोध को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने विश्वविद्यालय को शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की शुभकामनाएं दीं।
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने कहा कि संस्कृत के संरक्षण और प्रसार के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समाज और नई पीढ़ी की भागीदारी भी जरूरी है। कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि संस्कृत को आधुनिक विषयों और समाजोपयोगी ज्ञान से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस अवसर पर प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय, गुवाहाटी के कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, विश्वविद्यालय के शिक्षक, कार्यपरिषद एवं विद्या परिषद के सदस्य तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


