रुड़की, 22 अप्रैल।सोनी रोड़।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल की है। संस्थान के ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (RuTAG) द्वारा विकसित नवाचारी तकनीकों का उद्योगों को सफलतापूर्वक हस्तांतरण किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, उद्यमिता और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

यह पहल भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) कार्यालय के सहयोग से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण जरूरतों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और जमीनी स्तर पर उपयोगी समाधान उपलब्ध कराना है।
आईआईटी रुड़की द्वारा हस्तांतरित तकनीकों में मल्टी-मिलेट डिहस्किंग मशीन और हेम्प डिकॉर्टिकेटर मशीन शामिल हैं। इनका विकास RuTAG 2.0 टीम ने किया है। ये मशीनें श्रम कम करने, कार्यक्षमता बढ़ाने और ग्रामीण व लघु उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए तैयार की गई हैं।
मल्टी-मिलेट डिहस्किंग मशीन से मोटे अनाजों की प्रोसेसिंग तेज और आसान होगी, जिससे समय, श्रम और दानों की क्षति में कमी आएगी। वहीं हेम्प डिकॉर्टिकेटर मशीन से हेम्प फाइबर और लकड़ी जैसे हिस्सों को अलग किया जा सकेगा, जिससे वस्त्र, निर्माण सामग्री और अन्य उद्योगों में उपयोग बढ़ेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
इस तकनीकी हस्तांतरण के लिए इंडो क्लाइमेट लैब प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली), जय मां दुर्गा इंजीनियरिंग कंपनी (रुड़की) और धीमन एंटरप्राइजेज (रुड़की) के साथ समझौते किए गए।
इस मौके पर आईआईटी रुड़की के अधिष्ठाता (SRIC) प्रो. विवेक कुमार मलिक, सह-अधिष्ठाता प्रो. साई रामुडु मेका, RuTAG टीम के प्रधान अन्वेषक प्रो. सुनील कुमार सिंगल, प्रो. सोनल के. ठेंगाने सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य तकनीकी नवाचारों को समाज और उद्योग के उपयोग तक पहुंचाना है। RuTAG जैसी पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगी।

