रुड़की। गॉडविन लाइव।
कहते हैं, इंसान अगर अपनी जड़े भूल जाए तो उसकी इमारत गिर जाती है — और अगर अपनी जड़ों से जुड़ा रहे, तो वही उसकी असली पहचान होती है। इस बात का सबसे सुंदर उदाहरण हैं रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा, जिन्होंने अपने जीवन की शुरुआत ‘प्रकाश स्वीट्स’ से की थी और आज राजनीति के शीर्ष पदों पर पहुंचने के बाद भी अपनी उसी मिट्टी, उसी मिठास और उसी मेहनत से जुड़े हुए हैं।
व्यापार से सेवा तक — जीवन का निरंतर लक्ष्य
विधायक प्रदीप बत्रा का मानना है कि व्यापार सिर्फ कमाई नहीं, कर्म है और कर्म ही पूजा है। वह आज भी अपने दिन की शुरुआत अपने व्यवसाय स्थल प्रकाश स्वीट्स एंड होटल से करते हैं। भीड़भाड़ के बीच मिठाई की खुशबू में खोए ग्राहकों के बीच खड़े होकर वह खुद मिठाई के डिब्बे जांचते हैं, पैकिंग में मदद करते हैं और अपने कर्मचारियों से आत्मीयता से बात करते हैं।
उनकी यह आदत केवल एक व्यापारी की नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य की पूजा करने वाले साधक की है।
वह कहते हैं “अगर आप अपनी मिठाई खुद नहीं बना सकते, खुद नहीं चख सकते, तो दूसरों को मिठास कैसे दे सकते हैं?”
लक्ष्मी पूजन नहीं, लक्ष्य पूजन की परंपरा
गॉडविन लाइव की मुहिम “अपने लक्ष्य की पूजा करो” के तहत प्रदीप बत्रा का जीवन इस विचार का जीता-जागता उदाहरण है।
उनका मानना है —“दीपावली केवल दीपों का पर्व नहीं, यह अपने कर्म, अपने व्यवसाय और अपने लक्ष्य के प्रति श्रद्धा का पर्व है।”
हर वर्ष दीपावली पर वह स्वयं दुकान पर खड़े होकर ग्राहकों को मिठाई के डिब्बे अपने हाथों से देते हैं। उनके चेहरे पर वही संतोष झलकता है जो किसी संत को साधना के बाद मिलता है।
वे कहते हैं —“जब मैं अपने ग्राहक को खुश देखकर मुस्कुराता हूं, तो मुझे लगता है, यही असली लक्ष्मी पूजन है।”
सरलता में श्रेष्ठता की मिसाल
नगर पालिका अध्यक्ष से लेकर विधायक और अब उत्तराखंड सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के बावजूद प्रदीप बत्रा की सादगी और जमीनी जुड़ाव उन्हें विशिष्ट बनाता है। उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया, पर अपनी जड़ों को कभी नहीं छोड़ा।
उनके लिए राजनीति सेवा है, और व्यापार साधना।-
दीपावली का संदेश — अपने लक्ष्य से जुड़ो
दीपावली के अवसर पर विधायक प्रदीप बत्रा ने शहरवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा —
“प्रकाश सिर्फ दीपों में नहीं, विचारों में भी होना चाहिए।अपने व्यापार, अपने काम, अपने परिवार यानी अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहिए।
जब हम अपनी जड़ों को नहीं भूलते, तब ही असली समृद्धि हमारे जीवन में आती है।”


