दीपावली का असली अर्थ लक्ष्य की पूजा और आत्मप्रकाश का पर्व
डॉ. सुधीर गर्ग गुरु जी का स्पष्ट संदेश “दीप जलाइए, लेकिन पहले अपने लक्ष्य को पहचानिए”
(गॉडविन लाइव की विशेष जन-जागरण रिपोर्ट)
रुड़की। सोनी रोड़।
दीपावली का पर्व नज़दीक है और पूरे देश में एक ही सवाल गूंज रहा है — दीपावली 20 को मनाई जाए या 21 को?
इसी भ्रम को दूर करने और इसके वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ को समझने के लिए गॉडविन लाइव की टीम ने रुड़की के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. सुधीर गर्ग से विस्तृत बातचीत की।
डॉ. गर्ग ने इस विषय पर स्पष्ट करते हुए कहा —
“दीपावली कोई तिथि का खेल नहीं, यह आत्मचेतना और लक्ष्य की आराधना का पर्व है। लक्ष्मी पूजन का वास्तविक अर्थ ‘लक्ष्य की पूजा’ है — यानी अपने उद्देश्य, अपने कर्म और अपने मार्ग के प्रति निष्ठा। जो व्यक्ति अपने लक्ष्य की आराधना करता है, वही सच्चे अर्थों में लक्ष्मी पूजन करता है।”
उन्होंने बताया कि प्राचीन परंपरा में अमावस्या का महत्व केवल अंधकार का नहीं, बल्कि अंधकार में प्रकाश खोजने की साधना का प्रतीक है।
“अमावस्या की तिथि जब सूर्य उदय के समय विद्यमान रहती है, तभी वह पूजा के योग्य होती है। अतः इस वर्ष दीपावली 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी, क्योंकि वही अमावस्या सूर्य उदय पर है। जो लोग 20 तारीख की रात को पूजा करते हैं, वह तांत्रिक परंपरा मानी जाती है, न कि वैदिक।”
डॉ. गर्ग ने कहा कि आज समाज भ्रम की स्थिति में इसलिए फंसता जा रहा है क्योंकि सच्चे ज्ञान की जगह दिखावे और मेकअप ने ले ली है।
“कई लोग मंचों पर, कैमरे के सामने सजधज कर ज्ञान बांटते हैं, लेकिन उनके पास वास्तविक ज्योतिष ज्ञान नहीं होता। मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में योग्य विद्वानों की कमी ही समाज में ऐसे भ्रम की जड़ है।”
उन्होंने यह भी बताया कि दीपावली का असली अर्थ केवल दीप जलाना नहीं, बल्कि जीवन में अपने लक्ष्य को प्रकाशित करना है।
“जैसे किसान सुबह खेत में जाकर अपने कर्म को आरंभ करता है, व्यापारी अपनी दुकान पर लक्ष्मी पूजन से दिन की शुरुआत करता है, ब्राह्मण अध्ययन करके ब्रह्मांड में ज्ञान फैलाने का काम सुबह ही पूजा पाठ से शुरू करते हैं, क्षत्रिय लोग अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, धर्म के लिए पुलिस फोर्स वाले लोग, सफाई कर्मी सभी लोग सुबह उठकर पूजा पाठ करके अपने लक्ष्य पर लग जाते हैं वैसे ही हर व्यक्ति को अपने लक्ष्य की पूजा करनी चाहिए। यही सच्ची दीपावली है — आत्मप्रकाश की दीपावली।”
डॉ. गर्ग के अनुसार, लक्ष्मी पूजन का सही समय इस वर्ष 21 अक्टूबर की शाम 6:30 बजे से 9:00 बजे के बीच रहेगा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सामाजिक मीडिया के भ्रम में न पड़ें और वैदिक परंपरा के अनुसार दीपावली मनाएं।
अंत में डॉ. गर्ग ने एक प्रेरक संदेश दिया —
“दीप जलाइए, पर केवल घर में नहीं — अपने विचारों, कर्म और लक्ष्य में भी।
दीपावली तभी पूर्ण होगी जब हमारे भीतर का अंधकार भी प्रकाश में बदल जाएगा।”
गॉडविन लाइव की यह पहल ‘जन-जागरण सीरीज़’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य समाज को केवल सूचना नहीं, सत्य और समझ प्रदान करना है।


