कान, नाक और गले के सामान्य रोगों के आयुर्वेदिक व आधुनिक उपचार पर छात्रों को मिली जानकारी

रुड़की।सोनी रोड़।क्वाड्रा पीजी इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, रुड़की के शालाक्य तंत्र विभाग की ओर से “कॉमन ईएनटी (कान, नाक एवं गला) प्रॉब्लम्स” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ईएनटी से जुड़े सामान्य एवं जटिल रोगों की पहचान, उपचार और व्यावहारिक चिकित्सकीय अनुभवों से अवगत कराना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के सचिव डॉ. रकम सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को अनुभवी चिकित्सकों के व्यावहारिक अनुभवों से भी सीखने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे कार्यक्रम भविष्य के चिकित्सकों के व्यक्तित्व और व्यावसायिक दक्षता को मजबूत बनाते हैं।
मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. दयाशंकर सिंह, विभागाध्यक्ष शालाक्य तंत्र एवं चिकित्सालय अधीक्षक, पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज ने कान, नाक एवं गले के सामान्य और जटिल रोगों, उनकी प्रारंभिक पहचान, बचाव, आयुर्वेदिक एवं आधुनिक चिकित्सा के समन्वित उपचार तथा रोगी प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न क्लीनिकल केस स्टडी के माध्यम से विषय को सरल और व्यावहारिक रूप में समझाया।
व्याख्यान के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञ से अनेक चिकित्सकीय जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में संस्थान की ओर से प्रो. डॉ. दयाशंकर सिंह को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
प्राचार्य डॉ. जितेंद्र कुमार ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों के शैक्षणिक, नैदानिक और व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही।
इस अवसर पर संस्थान के विभागाध्यक्ष, चिकित्सक, अध्यापकगण, यूजी, पीजी एवं इंटर्न छात्र-छात्राओं सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।


