रुड़की। सोनी रोड़।पारंपरिक माटी कला को संरक्षण देने, स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में जिला उद्योग केंद्र, हरिद्वार की ओर से पहल की गई है। रामनगर स्थित माटी कला प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित दो माह के माटी कला प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया।

कार्यक्रम में रुड़की की महापौर श्रीमती अनीता ललित अग्रवाल ने भी सहभागिता की और डॉ. निशंक का स्वागत किया। इस दौरान महापौर ने स्थानीय माटी कला से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 10 हजार मिट्टी के दीये तैयार कराने की पहल की।
महापौर ने कहा कि स्थानीय कलाकारों के हुनर को सम्मान देने के साथ-साथ उन्हें आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीयों के निर्माण को बढ़ावा देने की यह पहल स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनेगी। उन्होंने इस पहल को “एक दीया समृद्धि का, एक दीया आत्मनिर्भरता का और एक दीया रुड़की की प्रगति का” भावना से जोड़ते हुए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में माटी कला बोर्ड के उपाध्यक्ष शोभाराम प्रजापति, राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, राज्य मंत्री श्यामवीर सैनी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी समेत विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी, माटी कला से जुड़े कलाकार, प्रशिक्षणार्थी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
परंपरागत कला को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक माटी कला के संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही युवाओं एवं कलाकारों को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को माटी कला से जुड़े विभिन्न कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक दौर में पारंपरिक कलाओं को नई तकनीक, बेहतर डिजाइन और बाजार की मांग से जोड़कर कारीगरों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए। इससे न केवल स्थानीय कला और संस्कृति को संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि इससे जुड़े परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
10 हजार मिट्टी के दीये तैयार कराने की पहल को स्थानीय माटी कला और कारीगरों को बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


