रुड़की, 25 जून 2025।
दंत चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता और मानकीकरण को लेकर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), देहरादून शाखा द्वारा मंगलवार को होटल दीप रेज़ीडेंसी, रुड़की में “मानक मंथन एवं उद्योग संवेदनशीलता कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दंत चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े उपकरणों के लिए अधिसूचित भारतीय मानकों — IS 19051:2025, IS 18951:2025 एवं IS 18101:2023 — तथा गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (QCOs) की जानकारी उद्यमियों और निर्माताओं तक पहुंचाना था।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद श्रीमती कल्पना सैनी ने BIS के इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “गुणवत्ता और सुरक्षा किसी भी सशक्त राष्ट्र की नींव होते हैं। भारत में निर्मित चिकित्सा उपकरणों की पहचान वैश्विक स्तर पर तभी बन सकती है, जब वे निर्धारित मानकों का पालन करें। उन्होंने सभी उद्यमियों से BIS प्रमाणन अपनाने और ‘मेक इन इंडिया’ को गति देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उत्तराखंड माटी कला बोर्ड के राज्य मंत्री श्री शोभराम प्रजापति और रुड़की स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष श्री भरत भूषण ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि BIS मानकों के पालन से MSMEs को बाजार में प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी और निर्यात संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
BIS देहरादून के निदेशक एवं प्रमुख श्री सौरभ तिवारी ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दंत चिकित्सा उपकरणों में गुणवत्ता और जैव-संगतता बनाए रखना रोगियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जीवन रक्षक उपकरण, उन्नत निदान तकनीक और डिजिटल प्रमाणन प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में रुड़की, भगवानपुर, बहादराबाद, सिडकुल और हरिद्वार क्षेत्र से 80 से अधिक दंत उपकरण निर्माता, उद्यमी, आपूर्तिकर्ता, और शैक्षणिक/सरकारी प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रमुख प्रतिभागियों में केतन भारद्वाज, अजय गर्ग, राकेश मित्तल, सुनील पांडे, आत्मा सिंह, शिवम गोयल, राजकुमार शर्मा, ए क्यूं अंसारी, राहुल प्रजापति, अशोक शुक्ला आदि शामिल रहे।
प्रतिभागियों ने BIS के तकनीकी विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद कर तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया और दंत चिकित्सा उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की दिशा में जरूरी जानकारी हासिल की।
यह कार्यक्रम न केवल उद्योग के मानकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में गुणवत्ता की एक नई सोच को भी जन्म देने वाला साबित हुआ।


