रुड़की। सोनी रोड। रक्षाबंधन पर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में महिलाओं समेत यात्रियों के लिए मुफ्त बस सफर की सुविधा तो मिल गई, लेकिन यात्रियों को बसें नहीं मिलीं। शुक्रवार को रुड़की रोडवेज बस अड्डे पर सुबह से ही यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बस में चढ़ने के लिए लोगों में धक्का-मुक्की और मारामारी जैसे हालात नजर आए। कोई सामान लेकर बस की ओर भागता दिखाई दिया तो कोई गोद में बच्चे को लेकर बस पकड़ने की कोशिश करता रहा।

मुफ्त सफर की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने निजी वाहनों के बजाय रोडवेज बस से यात्रा करना बेहतर समझा। इसका असर बस अड्डे पर साफ दिखाई दिया। यात्रियों की भीड़ बढ़ती गई, लेकिन उसके अनुपात में बसों की व्यवस्था नहीं हो सकी। कई महिलाएं बस में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करती नजर आईं, जबकि गलत बस में चढ़ जाने पर यात्रियों को बीच रास्ते में उतरना पड़ा।
फ्री सफर ने बढ़ाया असमंजस
रक्षाबंधन पर मुफ्त यात्रा को लेकर यात्रियों के बीच भी भ्रम की स्थिति बनी रही। रुड़की से देहरादून जाने वाला यात्री मुफ्त सफर कर सकता है, लेकिन यदि उसे रास्ते में छुटमलपुर उतरना है तो किराया देना पड़ता है। इसी तरह रुड़की से उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए नारसन तक मुफ्त यात्रा और उसके बाद किराया लगने की स्थिति ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी।
ड्राइवर है तो बस नहीं, बस है तो ड्राइवर नहीं
रोडवेज बस अड्डे पर व्यवस्था की एक और तस्वीर सामने आई। कहीं बस खड़ी रही तो चालक का इंतजार होता रहा और कहीं चालक मौजूद था तो बस की व्यवस्था नहीं हो सकी। कुछ यात्रियों को यह कहकर इंतजार कराया गया कि चालक खाना खाने गया है और बस करीब आधे घंटे बाद चलेगी। गर्मी और उमस के बीच यात्रियों को घंटों बस का इंतजार करना पड़ा।
रिश्तों के त्योहार में सफर ने छीन लिया समय
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए घरों से निकली महिलाओं और परिवारों का काफी समय बसों के इंतजार और भीड़ में गुजर गया। यात्रियों का कहना था कि मुफ्त सफर की सुविधा अच्छी है, लेकिन यदि उसके लिए पर्याप्त बसों और स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई तो सुविधा परेशानी में बदल जाती है।
रुड़की रोडवेज बस अड्डे पर शुक्रवार को यही तस्वीर देखने को मिली—सफर फ्री था, लेकिन बस के लिए संघर्ष करना पड़ा। परिवहन विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए यात्रियों ने कहा कि त्योहार के दिन जब यात्रियों की संख्या पहले से पता थी, तो अतिरिक्त बसों और चालक-परिचालकों की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई?


