रुड़की। सोनी रोड़।शहर में गंगनहर के किनारे बने घाट केवल धार्मिक और सामाजिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि शहर की पहचान और विरासत भी हैं। इन घाटों के निर्माण और नामकरण को लेकर समाज और संगठनों के संघर्ष की लंबी कहानियां रही हैं। लोग अपने पूर्वजों और समाज के महापुरुषों के नाम पर घाटों के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं, लेकिन सवाल यह है कि निर्माण और नामकरण के बाद इन स्थानों के रखरखाव, स्वच्छता और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
रुड़की के कश्यप घाट की स्थिति इन दिनों गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम ढलते ही घाट और आसपास का क्षेत्र असामाजिक तत्वों के जमावड़े का स्थान बन जाता है। पर्याप्त रोशनी, नियमित सफाई और प्रभावी निगरानी के अभाव में यहां आने वाले परिवार स्वयं को असहज महसूस करते हैं।
स्थिति की विडंबना यह है कि शाम के समय आसपास धार्मिक माहौल भी दिखाई देता है। एक ओर गंगा आरती होती है तो दूसरी ओर रविदास घाट पर भजन-कीर्तन की आवाज सुनाई देती है। लेकिन इसी क्षेत्र में कश्यप घाट पर कथित रूप से असामाजिक गतिविधियों और झगड़े की घटनाएं लोगों के लिए चिंता का कारण बन रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट और पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों पर परिवार के साथ बैठना या घूमना मुश्किल होता जा रहा है। उनका आरोप है कि शाम के समय यहां नशाखोरी और असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों का जमावड़ा रहता है। कई लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
चंद्रशेखर चौक और कोतवाली के पास होने के बावजूद चिंता
कश्यप घाट से कुछ ही दूरी पर चंद्रशेखर चौक पर पुलिस की मौजूदगी रहती है और रुड़की की प्रमुख कोतवाली भी अधिक दूर नहीं है। इसके बावजूद यदि सार्वजनिक स्थानों पर असामाजिक तत्व बेखौफ होकर उत्पात मचाते हैं तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोगों का कहना है कि विवाद या झगड़े की स्थिति में कई बार राहगीर बीच-बचाव करने से भी बचते हैं। ऐसे में महिलाओं, बच्चों और परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ जाती है।
नगर निगम, समिति और पुलिस से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने नगर निगम से घाट पर नियमित सफाई, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही जिस समिति या संगठन के नाम से घाट की देखरेख की जिम्मेदारी जुड़ी है, उनसे भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।
पुलिस प्रशासन से मांग की गई है कि शाम के समय घाट और आसपास के क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाई जाए और सार्वजनिक स्थान पर कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
रुड़की को शिक्षा नगरी के रूप में जाना जाता है और शहर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग गंगनहर किनारे स्थित घाटों से गुजरते हैं। ऐसे में इन सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, स्वच्छता और गरिमा बनाए रखना केवल किसी एक विभाग की नहीं बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।


