रिपोर्ट : सोनी रोड़, रुड़की से
रुड़की में “एक तू सच्चा, तेरा नाम सच्चा गुरु गद्दी दरबार फूलसन्दे रुड़की सत्संग सेवा समिति” द्वारा आयोजित दो दिवसीय सत्संग कार्यक्रम में आध्यात्मिकता की अलौकिक धारा प्रवाहित हो रही है। 28 और 29 अक्टूबर को रामनगर स्थित कार्यक्रम स्थल में संत पुरुष बाबा फुलसन्दे वाले जी ने अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को परमात्मा की सच्ची पहचान की ओर प्रेरित किया।

संत बाबा फुलसन्दे जी से हुई वार्ता में उन्होंने कहा कि – “मनुष्य को रोज़ चारों वेदों का एक-एक श्लोक समझने का प्रयास करना चाहिए।”
उन्होंने प्रसिद्ध जर्मन विद्वान मैक्स मूलर का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उन्होंने पहली बार वेदों का अंग्रेज़ी में अध्ययन किया तो उन्हें यह “गडरियों के गीत” प्रतीत हुए। लेकिन जब उन्होंने संस्कृत सीखी और वेदों का मूल रूप में अध्ययन किया, तब उन्होंने कहा — “यह तो देवों का ज्ञान है।”

बाबा जी ने कहा, “भारत जैसा ज्ञान संसार में कहीं नहीं। यह देवभूमि इसलिए कहलाती है क्योंकि यहां की मिट्टी में ही ईश्वर की चेतना रची-बसी है।”
उन्होंने बताया कि प्राचीन ऋषि-कवि, जो पैगंबरों से भी हजारों वर्ष पहले हुए, उन्होंने भी यही प्रार्थना की थी “मेरी सारी संपत्ति ले लो, पर मुझे भारत में एक दिन और एक रात इस दिव्य ज्ञान को पाने दो।”
बाबा फुलसन्दे जी ने कहा कि परमात्मा कोई बाहरी शक्ति नहीं, वह अंतर्यामी है हर कण, हर प्राणी, हर पेड़-पौधे, हर प्रकाश में वही ज्योति है।मनुष्य को देवताओं जैसा बनना चाहिए और यम-नियमों का पालन करते हुए जीवन जीना चाहिए -सत्य, अहिंसा, चरित्र की पवित्रता, चोरी न करना, स्वार्थ से ऊपर उठना, परोपकार में ईश्वर की सेवा करना, और प्राणी में परमात्मा को देखना।
उन्होंने कहा, “जब मनुष्य इन सिद्धांतों को जीवन में उतारता है, तब वह शिवतुल्य हो जाता है तब परम ब्रह्म का साक्षात्कार संभव होता है।”
बाबा जी ने यह भी कहा कि सभी धर्मों में ‘राजधर्म’ सर्वोपरि है —
“राष्ट्र रहेगा तो संस्कृति बचेगी।जीवन का प्रत्येक कर्म राष्ट्र और मानवता की सेवा में होना चाहिए। मनुष्य मात्र की सेवा ही परमात्मा की सच्ची साधना है।”


