हरिद्वार/रुड़की। हरिद्वार में गंगाजल लेने पहुंचे कांवड़ यात्रियों की भारी संख्या के बीच इस बार यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना उत्तराखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही, लगातार बढ़ता वाहनों का दबाव, बारिश और दिन-रात चलने वाली व्यवस्था के बीच पुलिस अधिकारियों और जवानों ने मोर्चा संभाले रखा। इस पूरी व्यवस्था में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें सीओ ट्रैफिक बिपेंद्र सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया।

बिपेंद्र सिंह को कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था का लंबा अनुभव है। वर्ष 2016 में रुड़की में ट्रैफिक इंस्पेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली कांवड़ यात्रा के एंट्री प्वाइंट और यातायात दबाव को करीब से समझा था। उस समय रुड़की में एडीबी की पाइपलाइन बिछाने के कारण शहर की कई प्रमुख सड़कों की स्थिति खराब थी। कांवड़ मेले के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती थी।
उस समय बिपेंद्र सिंह की देखरेख में यातायात को व्यवस्थित करने के लिए पहली बार नियोजित वन-वे व्यवस्था लागू की गई। मंगलौर से यातायात को डायवर्ट कर लक्सर और हरिद्वार की ओर भेजने की व्यवस्था ने भीड़ के दबाव को कम करने में मदद की। सीमित संसाधनों के बावजूद यातायात को बिना बड़े अवरोध के संचालित करने के उस अनुभव को इस बार की व्यवस्था में भी उपयोगी माना गया।
रुड़की में यातायात पुलिस लाइन के प्रयासों की भी हुई थी सराहना
रुड़की में यातायात पुलिस के लिए अलग व्यवस्था विकसित करने में भी बिपेंद्र सिंह के प्रयासों की चर्चा रही है। जनता और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से यातायात पुलिस लाइन की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में किए गए प्रयासों का असर आज रुड़की की यातायात व्यवस्था में दिखाई देता है। यही अनुभव आगे चलकर कांवड़ जैसे बड़े आयोजनों में यातायात प्रबंधन के लिए उपयोगी साबित हुआ।
इस बार हरिद्वार में तैनाती के दौरान भी बिपेंद्र सिंह ने स्थानीय परिस्थितियों और पुराने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए यातायात संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एसपी ट्रैफिक निशा यादव के साथ समन्वय बनाकर अधिकारियों और फील्ड टीम के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।
लंढौरा से लक्सर और मंगलौर से नगला इमरती तक डायवर्जन पर फोकस
कांवड़ यात्रा के दौरान लंढौरा से लक्सर तक और मंगलौर से नगला इमरती होते हुए यातायात के डायवर्जन की व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए लगातार निगरानी की गई। फील्ड में अधिकारियों की मौजूदगी, समय-समय पर यातायात प्लान में बदलाव और विभिन्न टीमों के बीच बेहतर समन्वय ने व्यवस्था को बनाए रखने में मदद की।
कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बावजूद यातायात को अपेक्षाकृत सुचारु बनाए रखने को लेकर पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली की सराहना हो रही है। खास तौर पर अधिकारियों की मौके पर मौजूदगी, आपसी समन्वय और अनुभव के इस्तेमाल को व्यवस्था की मजबूती माना जा रहा है।
बारिश हो या रात का समय, भारी भीड़ हो या यातायात का बढ़ता दबाव—कांवड़ ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों ने लगातार मैदान में रहकर जिम्मेदारी निभाई। इसी टीमवर्क के बीच सीओ ट्रैफिक बिपेंद्र सिंह का अनुभव भी इस बार की यातायात व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आया।


