“राष्ट्र प्रथम: भारतीय जनता पार्टी की विचार यात्रा और गौरवशाली संघर्ष”
6 अप्रैल भारतीय राजनीति में सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, विचारधारा और जनसेवा के प्रति संकल्प का प्रतीक है। यह वह दिन है जब 1980 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना हुई थी। यह पार्टी सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण, एकात्मक मानववाद और “राष्ट्र प्रथम” की भावना का जीवंत उदाहरण है।

आजादी के बाद जब देश नवनिर्माण की राह पर अग्रसर था, तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के कांग्रेस से वैचारिक मतभेद उभरे। इन मतभेदों ने भारतीय जनसंघ को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी का आधार तैयार किया। यह वैचारिक संघर्ष मात्र सत्ता की राजनीति नहीं थी, बल्कि यह देश को वैकल्पिक विचार और नेतृत्व देने का एक सशक्त प्रयास था।

1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना से लेकर 1977 में जनता पार्टी के विलय और फिर 1980 में भाजपा की पुनः स्थापना तक की यात्रा विचारों, आदर्शों और आत्मबल की मिसाल रही है। 1984 में मात्र दो सीटों पर सिमटने के बावजूद भाजपा ने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। यह पार्टी संघर्षों से घबराई नहीं, बल्कि और अधिक मजबूत होकर उभरी।
1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में स्थिर और प्रभावशाली एनडीए सरकार का गठन हुआ, जिसने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। और फिर 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने एक नया युग शुरू किया। मोदी युग में भाजपा ने सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि जनता का विश्वास और देश की आत्मा को भी अपने साथ जोड़ा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने गरीब, वंचित, पिछड़े, महिलाएं और युवाओं सहित हर वर्ग को जोड़ने का कार्य किया। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” केवल नारा नहीं, बल्कि नीति और नीयत की दिशा बन गई। भाजपा आज घर-घर तक पहुंच चुकी है, हर राज्य में उसकी उपस्थिति है और यह सब संभव हो पाया है उसके कार्यकर्ताओं की निष्ठा, समर्पण और सेवा भावना के कारण।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मक मानववाद ने भाजपा को यह दिशा दी कि राष्ट्र निर्माण का मार्ग व्यक्ति निर्माण से होकर गुजरता है। यही कारण है कि भाजपा का कार्यकर्ता केवल राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि समाज का सजग प्रहरी होता है।
आज भाजपा न केवल भारत में, बल्कि विश्व मंच पर भी एक सशक्त विचारधारा और नेतृत्व का प्रतीक बन चुकी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।
6 अप्रैल को पार्टी का स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और संकल्प का दिन होता है—अपने अतीत से प्रेरणा लेने और भविष्य को उज्जवल बनाने का अवसर। यह यात्रा एक राजनीतिक संगठन की नहीं, बल्कि राष्ट्र को गौरवशाली, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाने के संकल्प की यात्रा है।
“राष्ट्र प्रथम”— यही भाजपा की आत्मा है, यही उसका मूलमंत्र है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।


