रुड़की। सोनी रोड़।
श्री दुर्गा मां दुर्गा चौक, नेहरू स्टेडियम परिसर में शारदीय नवरात्र के पहले दिन ही बड़ी चहल-पहल और श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। मंदिर प्रांगण में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी और मां दुर्गा के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।
नवरात्र केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन और संस्कृति का बहुआयामी उत्सव है। यह पर्व हमें सतर्क, साहसी और विजय मानसिकता अपनाने की प्रेरणा देता है। शारदीय नवरात्र का समय मानसून के समापन और नई फसल की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। कई किसान इस अवसर पर देवी दुर्गा से भरपूर उपज और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। इस तरह यह पर्व आध्यात्मिकता और कृषि कैलेंडर दोनों को एक साथ जोड़ता है।
नवरात्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी क्षेत्रीय विविधता है।
बंगाल में यह पर्व दुर्गा पूजा के रूप में भव्यता के साथ मनाया जाता है।
गुजरात में इसकी पहचान गरबा और डांडिया रास जैसे ऊर्जावान लोकनृत्यों से है।
तमिलनाडु में गोलू और गुड़ियों की कलात्मक सजावट इसकी विशिष्ट पहचान है।
भले ही उत्सव की शैली अलग हो, लेकिन इसका सार एक ही है – शक्ति की उपासना और विविधता में एकता का संदेश।
नवरात्र हमें यह भी सिखाता है कि परिवार, समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए हमें अपनी आंतरिक और बाहरी शक्तियों को संतुलित करना चाहिए। नौ दिनों तक नौ देवियों की उपासना यह संदेश देती है कि शांति, समृद्धि और विकास की राह में आने वाली नकारात्मक शक्तियों का मुकाबला करने के लिए सामूहिक जागरूकता और शक्ति की आवश्यकता है।
आज जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, नवरात्र जैसे पर्व हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए आत्मबल, अनुशासन और एकजुटता की प्रेरणा देते हैं। वास्तव में यह उत्सव भारतीय जीवन मूल्यों का दर्पण और पूरे देश को एक सूत्र में बांधने वाला पर्व है।


