रुड़की। आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर के केशव भवन सभागार में शनिवार को सप्तशक्ति संगम मातृ सम्मेलन श्रृंखला के अंतर्गत षष्ठम् मातृ सम्मेलन धूमधाम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंचदशनाम जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर साध्वी मैत्रेयी गिरी जी महाराज तथा भारतीय एकेडमी की प्रधानाचार्य श्रीमती रमनीत कौर ने मुख्य अतिथि के रूप में मातृशक्ति को संबोधित किया।
मुख्य अतिथियों ने दिया मातृशक्ति को प्रेरक संदेश
साध्वी मैत्रेयी गिरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज की कर्णधार नारी ही है, इसलिए स्त्री को अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव सजग और जागरूक रहना चाहिए।
वहीं, श्रीमती रमनीत कौर ने कहा कि आधुनिक युग में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि मोबाइल फोन जो कोरोना काल में आवश्यकता था अब बच्चों के लिए दूरी का विषय होना चाहिए।
अध्यक्षता और संचालन
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी साहित्य की विद्वान और पूर्व प्राचार्या श्रीमती मधुराका सक्सेना ने की।
कार्यक्रम संयोजिका श्रीमती भावना शर्मा और व्यवस्था प्रमुख श्रीमती कामना भारद्वाज रहीं।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती नीलम शर्मा ने किया।
मातृशक्ति के योगदान का सम्मान
कार्यक्रम में समाज और राष्ट्रहित में विशिष्ट योगदान देने वाली कई माताओं को विशिष्ट सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए श्रीमती कामना भारद्वाज ने बताया कि सप्तशक्ति संगम का उद्देश्य माताओं में स्वधर्म, ज्ञान और संस्कार की भावना को जागृत करना है।
बालिकाओं ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम
विद्यालय की संगीत आचार्या नेहा चड्डा के निर्देशन में सृष्टि, अवनी, देविका, काशी, अनुरवी आदि छात्राओं ने वंदना प्रस्तुत की और “हम ही मातृशक्ति हैं” गीत गाया।

अन्या भारद्वाज, रेणुका सिंह, कुमुद अग्रवाल आदि बालिकाओं ने देश की आदर्श एवं अनुकरणीय महिलाओं की भूमिका का मंचन किया, जिसमें समाज में महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में लावण्या, आराध्या, निधि, तृप्ति शर्मा, नंदिनी, प्रज्ञा सैनी, विदुषी शर्मा, भूमि, अंशिका, विनीशा, शगुन गिरी सहित कई छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
अंत में संयोजिका श्रीमती भावना शर्मा ने सभी अतिथियों, माताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।


