रुड़की, 23 फरवरी 2026। Indian Institute of Technology Roorkee (आईआईटी रुड़की) ने National Institute of Hydrology (एनआईएच) के सहयोग से 23–25 फरवरी तक आयोजित 4वें रुड़की वाटर कॉन्क्लेव (आरडब्ल्यूसी 2026) का भव्य उद्घाटन किया। इस वर्ष कॉन्क्लेव का विषय “नेक्सस दृष्टिकोण के माध्यम से सीमापार जल सहयोग” रखा गया है।

यह द्विवार्षिक कॉन्क्लेव वैश्विक नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और जल विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर उभरती जल चुनौतियों के एकीकृत एवं सतत समाधान पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करता है। प्रमुख विषयों में सीमापार नदी बेसिन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, हाइड्रो-मौसमीय चरम घटनाएँ, भूजल स्थिरता, जल गुणवत्ता तथा जल–ऊर्जा–खाद्य नेक्सस शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने की, जबकि एनआईएच के निदेशक डॉ. वाई.आर.एस. राव सह-अध्यक्ष रहे। कॉन्क्लेव के संयोजक प्रो. आशीष पांडे ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं कुलगीत से हुई।
मुख्य अतिथि के रूप में NITI Aayog के सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल ने मुख्य व्याख्यान दिया। वहीं International Water Management Institute (आईडब्ल्यूएमआई) के महानिदेशक डॉ. मार्क स्मिथ ने भी संबोधित किया।
प्रो. कमल किशोर पंत ने अपने संबोधन में कहा कि जल सुरक्षा का सीधा संबंध जलवायु सहनशीलता, खाद्य प्रणालियों और ऊर्जा स्थिरता से है। उन्होंने एआई डेटा सेंटरों के बढ़ते उपयोग के कारण जल की बढ़ती मांग का उल्लेख करते हुए विज्ञान-आधारित और सहयोगात्मक जल शासन की आवश्यकता पर बल दिया।
कॉन्क्लेव में अमेरिका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल, नीदरलैंड, कनाडा, जापान, नॉर्वे, श्रीलंका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और नेपाल सहित विभिन्न देशों से कुल 42 मुख्य वक्ता भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता ‘जल सहयोग में सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक-आर्थिक पहलू’ विषय पर उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा रही, जिसमें वरिष्ठ नीति-निर्माताओं और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विज्ञान, नीति और जमीनी नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पूर्ण सत्रों, तकनीकी चर्चाओं और नीति संवादों के माध्यम से आरडब्ल्यूसी 2026 अंतर्विषयी सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सहनशील एवं न्यायसंगत जल संसाधन प्रबंधन ढांचे को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखता है।
आईआईटी रुड़की, देश का सबसे प्राचीन तकनीकी संस्थान और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान, जल संसाधन एवं पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।


