पटना। बिहार की राजनीति में मार्च का महीना एक बार फिर ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। करीब 26 वर्ष पहले 3 मार्च 2000 को पहली बार Nitish Kumar बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें सिर्फ 7 दिन बाद ही इस्तीफा देना पड़ा था। अब 5 मार्च 2026 को उन्होंने सक्रिय मुख्यमंत्री पद की राजनीति से हटते हुए राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर कर दी है, जिसके साथ ही बिहार की सियासत में एक लंबे युग के अंत की चर्चा तेज हो गई है।

सोशल मीडिया पोस्ट में किया ऐलान
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से संकेत दिया है कि वे आगामी राज्यसभा चुनाव में उच्च सदन के सदस्य बनना चाहते हैं। उन्होंने लिखा कि वे नई सरकार को अपना अनुभव और मार्गदर्शन देना चाहते हैं।
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाने के बाद अब वे संसदीय जीवन के अपने उस पुराने सपने को पूरा करना चाहते हैं, जिसके तहत वे संसद और विधानमंडल के सभी चारों सदनों का हिस्सा बनना चाहते थे।
7 दिन की पहली सरकार
साल 2000 में नीतीश कुमार समता पार्टी के नेता के रूप में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उस समय बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ था।
Rabri Devi की सरकार गिरने के बाद सत्ता के समीकरण बदल गए थे। बहुमत के लिए 163 विधायकों की जरूरत थी, लेकिन उस समय आरजेडी 159 विधायकों पर ही अटक गई थी। दूसरी ओर एनडीए में शामिल दलों में Bharatiya Janata Party के पास 67 और समता पार्टी के पास 34 विधायक थे।
हालांकि बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट न होने के कारण नीतीश कुमार की सरकार सिर्फ 7 दिन ही चल सकी और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
लंबा राजनीतिक सफर
जेपी आंदोलन से निकले नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर संघर्ष और रणनीति से भरा रहा है। उन्हें सत्ता विरासत में नहीं मिली, बल्कि जमीनी राजनीति और गठबंधन प्रबंधन के जरिए उन्होंने बिहार में अपनी अलग पहचान बनाई।
2005 के बाद से लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बिहार की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई और विकास, सुशासन और गठबंधन राजनीति के केंद्र में बने रहे।
एक युग का अंत
अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा की ओर कदम बढ़ाने के संकेत के साथ ही बिहार की राजनीति में एक लंबे दौर के समाप्त होने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया है कि वे बिहार के विकास के संकल्प से जुड़े रहेंगे और नई सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे।


