रुड़की। सोनी रोड़।कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार पुलिस की ओर से शुरू की गई ‘मैन ऑफ द डे’ पहल में इस बार सेवा, संवेदनशीलता और सूझबूझ की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पुलिस व्यवस्था में आम नागरिक की भागीदारी की मिसाल पेश की है। विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) मयंक गौतम ने कांवड़ यात्रा के दौरान न केवल पुलिस के साथ यातायात और व्यवस्था संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में शिवभक्तों की मदद कर मानवता का परिचय भी दिया।

मयंक गौतम शहर में अपने सरल, गंभीर और सहयोगी व्यवहार के लिए पहचाने जाते हैं। पुलिस के प्रति उनका जुड़ाव और सेवा भाव उन्हें कांवड़ मेले में एसपीओ की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करता है। कांवड़ यात्रा के दौरान वह पुलिस अधिकारियों के साथ लगातार व्यवस्था संभालते नजर आए।
खंडित कांवड़ से बनी चुनौती, सूझबूझ से संभाला मामला
नहर पटरी स्थित संतोषी माता मंदिर के पास एक शिवभक्त की कांवड़ खंडित होने के बाद कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। मेरठ के मोहिद्दीनपुर गावड़ी निवासी लक्की 51 लीटर गंगाजल लेकर अपने साथियों के साथ जा रहे थे। इसी दौरान किसी व्यक्ति के हाथ लगने से कांवड़ असंतुलित होकर गिर गई और खंडित हो गई।
मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ गई। सूचना मिलने पर उपनिरीक्षक प्रमोद कुमार और एसपीओ मयंक गौतम मौके पर पहुंचे। दोनों ने सूझबूझ और संयम से श्रद्धालुओं को समझाया और स्थिति को शांत कराया।
इसके बाद पुलिस टीम ने शिवभक्त को हेड कांस्टेबल अरविंद के साथ हर की पैड़ी भेजकर दोबारा गंगाजल उपलब्ध कराया और उन्हें सुरक्षित उनके गंतव्य की ओर रवाना किया। पुलिस की इस संवेदनशील कार्रवाई की शिवभक्तों ने भी सराहना की।
घायल कांवड़िए को बारिश में पहुंचाया अस्पताल
मयंक गौतम की सेवा की दूसरी तस्वीर 5 अगस्त की रात टैंक चौक पर देखने को मिली। करीब नौ बजे दिल्ली के रोहिणी निवासी धीरज भगत पुत्र सुशील भगत घायल अवस्था में वहां पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके पैर में चोट लगी है, वह चल नहीं पा रहे हैं और उनके पास 25 लीटर गंगाजल भी है।
मयंक गौतम ने तत्काल उनकी चोट का जायजा लिया और उन्हें स्कूटी से अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि पैर का मांस फट गया है और उन्हें चलने से बचने की सलाह दी। इसके बाद मयंक गौतम घायल कांवड़िए को तेज बारिश के बीच स्कूटी से मंगलौर हाईवे तक छोड़ने पहुंचे, ताकि वह किसी वाहन की मदद से अपने गंतव्य तक पहुंच सके।
मयंक की इस निस्वार्थ सेवा से भावुक शिवभक्त ने उनका आभार जताया।
सेवा को मिला सम्मान
कांवड़ यात्रा में ऐसे ही उल्लेखनीय कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए हरिद्वार पुलिस की ओर से ‘मैन ऑफ द डे’ पहल चलाई जा रही है। मयंक गौतम का कार्य इस पहल की भावना को सार्थक करता है।
कांवड़ मेले में जहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच पुलिस के सामने हर दिन नई चुनौतियां आती हैं, वहीं एसपीओ जैसे स्वयंसेवी पुलिस सहयोगियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मयंक गौतम ने दिखाया कि वर्दी न होते हुए भी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सेवा भाव से पुलिस का मजबूत साथी बना जा सकता है।


