हरिद्वार—तीर्थनगरी हरिद्वार जल्द ही एक ऐतिहासिक और भव्य आध्यात्मिक केंद्र का साक्षी बनने जा रही है। तीर्थ सेवा न्यास ने 500 करोड़ रुपये की लागत से विश्व सनातन महापीठ की स्थापना की घोषणा की है। यह महापीठ न केवल सनातन धर्म के दर्शन, परंपरा और विज्ञान का संगम बनेगा, बल्कि युवाओं को शास्त्र, शस्त्र और रोजगारपरक प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।
हरिद्वार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान न्यास के संरक्षक और परमाध्यक्ष बाबा हठयोगी महाराज ने बताया कि विश्व सनातन महापीठ सनातन धर्म की गौरवशाली पुनर्स्थापना तथा संत परंपरा के संरक्षण का दिव्य केंद्र होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक तीर्थ स्थान नहीं, बल्कि युग निर्माण का वैश्विक केंद्र होगा, जहां वेद, संस्कृति, आध्यात्मिकता, राष्ट्रनिर्माण और पराक्रम एक साथ जीवंत होंगे।
शास्त्र और शस्त्र शिक्षा का संगम
न्यास के अध्यक्ष राम विशाल दास महाराज ने कहा कि महापीठ वह स्थान होगा, जहां शास्त्र और शस्त्र दोनों की प्रतिष्ठा होगी।
“यज्ञ से ऊर्जा, तप से शक्ति, सेवा से राष्ट्र निर्माण और सदाचार से समाज निर्माण—इन्हीं सिद्धांतों पर महापीठ की नींव रखी जाएगी,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि महापीठ के लिए भूमि चयन समिति का गठन किया गया है और जल्द ही भूमि का चयन कर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
500 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट
न्यास के अनुसार, प्रथम चरण का अनुमानित बजट 300 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि कुल निर्माण लागत 500 करोड़ रुपये तक प्रस्तावित है।
महत्वपूर्ण तारीखें निम्न हैं—
भूमि पूजन: 21 नवम्बर 2025
गौ संरक्षण एवं यज्ञशाला का उद्घाटन: 21 नवम्बर 2026
महापीठ का भव्य उद्घाटन: 22 फरवरी 2029
इसके साथ ही परिसर में 108 यज्ञशालाओं का निर्माण किया जाएगा।
वैदिक गुरुकुल से जीवंत होगी प्राचीन शिक्षा परंपरा
महापीठ परिसर में स्थापित होने वाला वैदिक गुरुकुल युवाओं को शास्त्र, संस्कृत, वेद, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष और अन्य प्राचीन भारतीय विद्याओं की शिक्षा देगा।
देशी गौ संरक्षण एवं शोध केंद्र भी इसकी महत्वपूर्ण इकाई होगा।
चारों शंकराचार्यों, 13 अखाड़ों के आचार्यों, महामंडलेश्वरों और महंतों के लिए स्थायी संत निवास का निर्माण किया जाएगा।
संत कुटिया, भक्त निवास और सनातन संसद
परियोजना में—
108 संत कुटिया
1008 भक्त निवास भवन
तपस्वियों व भक्तों के लिए स्थायी आवास
का निर्माण किया जाएगा।
इसके साथ ही धर्मादेश मंच की स्थापना की जाएगी, जहां से पूरे देश में सनातन जीवन पद्धति से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
महापीठ में वातानुकूलित संसद परिसर भी बनाया जाएगा, जहां प्रतिवर्ष भव्य “सनातन संसद” आयोजित की जाएगी।
विश्व सनातन महापीठ के निर्माण से हरिद्वार आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैदिक शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में और अधिक शक्ति से स्थापित होगा।


