हरिद्वार।
भारतीय किसान यूनियन द्वारा हरिद्वार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर के दूसरे दिन आज देशभर के किसान नेताओं और प्रतिनिधियों ने खेती-किसानी के वर्तमान संकट और सरकार की नीतियों पर गहन मंथन किया। इस चिंतन शिविर में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से किसानों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि “देश की खेती आज संकट के दौर से गुजर रही है। फसलों के उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है।” उन्होंने चेताया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो किसान पूरी तरह से आर्थिक रूप से टूट जाएगा।
राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने संगठन को गाँव स्तर तक मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि “अब संघर्ष की राह तय करनी होगी, सरकार की गलत नीतियों के विरुद्ध जनआंदोलन को और धार देनी होगी।”
राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने चेताया कि “सरकार की नीतियों से आने वाला समय किसानों के लिए और संघर्षपूर्ण होने वाला है। हमें जागरूक रहना होगा और एकजुटता बनाए रखनी होगी।”
पंचायत में ज्ञानी जैल सिंह के पौत्र इंद्रजीत सिंह रामगढ़िया ने भी विश्वकर्मा समाज के साथ हिस्सा लिया।
बैठक में संगठन की राष्ट्रीय एवं प्रदेश कार्यकारिणी के कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे, जिनमें हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रतन मान, युवा प्रदेश अध्यक्ष रवि आज़ाद, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजपाल शर्मा, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष दलजीत डागर, उपाध्यक्ष दानवीर सिंह आदि शामिल थे।
प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन, रखी 8 अहम मांगें
चिंतन शिविर में किसानों की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजा गया, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख माँगें उठाई गईं—
1. गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति कुन्तल किया जाए व बकाया भुगतान तत्काल कराया जाए।
2. देशभर के किसानों का सम्पूर्ण ऋण माफ किया जाए।
3. एमएसपी को कानूनी गारंटी मिले और C2+50 फॉर्मूले को लागू किया जाए।
4. खेती-किसानी को जीएसटी और एनजीटी से मुक्त किया जाए।
5. बिजली और संस्थाओं के निजीकरण को रोका जाए।
6. जीएम बीजों के ट्रायल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
7. भूमि अधिग्रहण मामलों में 2013 अधिनियम को लागू कर किसानों को उचित मुआवज़ा दिया जाए।
8. नई कृषि विपणन नीति (NPF on AM) को किसान विरोधी बताते हुए तत्काल रद्द करने की मांग।
भारतीय किसान यूनियन ने चेताया कि यदि इन मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो संगठन सड़कों पर उतरने को बाध्य होगा।


