शीर्षक: करवा चौथ — नारी समर्पण और भारतीय संस्कृति का प्रतीक, मनीषा बत्रा ने सहेलियों संग निभाई परंपरा
रुड़की। आज पूरे भारतवर्ष में करवा चौथ का पवित्र पर्व उल्लास और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भारतीय नारी के प्रेम, त्याग और समर्पण की उस भावना को अभिव्यक्त करता है, जो अपने जीवनसाथी की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और स्वस्थ जीवन के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है। चाहे कोई आम महिला हो या खास, चाहे वह देश में हो या विदेश में, हर जगह भारतीय महिलाएँ इस व्रत को पूरे श्रद्धा भाव से निभा रही हैं।
इसी परंपरा को जीवंत करते हुए मनीषा बत्रा ने शुक्रवार को अपने घर पर अपनी सहेलियों — मोनिका गर्ग, छवी मित्तल, दमयंती, सुप्रिया बत्रा, किरण भाटिया, नीता भाटिया, प्रतिभा, नीना, रेनू, मीनाक्षी, पूजा और वीणा — के साथ मिलकर करवा चौथ का पर्व अत्यंत भक्तिभाव से मनाया। घर को दीपों और फूलों से सजाया गया, महिलाओं ने पारंपरिक सोलह श्रृंगार किया, करवा माता की पूजा की और पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर अपने पतियों की लंबी उम्र की प्रार्थना की।
पूजा के दौरान मनीषा बत्रा ने कहा —
“करवा चौथ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह भारतीय नारी की आत्मिक शक्ति, समर्पण और प्रेम का प्रतीक है। इस व्रत में नारी अपने पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए स्वयं को ईश्वर के चरणों में अर्पित करती है। यह व्रत हमें यह भी सिखाता है कि भारतीय संस्कृति की जड़ें प्रेम और विश्वास से सींची गई हैं, जिन्हें हम हर पीढ़ी तक पहुँचाने का दायित्व निभाते हैं।”
उन्होंने आगे बताया कि रात में जब चाँद के दर्शन होंगे, तब सभी महिलाएँ चलनी से चाँद और फिर अपने पति के दर्शन कर भगवान से उनके दीर्घ जीवन की मंगल कामना करेंगी। इसके बाद व्रत खोला जाएगा और घर में पति की पसंद का भोजन परोसा जाएगा।
रात के भोजन में सभी लोग मिलकर अपनी मनपसंद चावल राजमा कढ़ी-चावल, आलू की सब्जी, मिठाई और फलों का प्रसाद तैयार किया गया है। सभी महिलाओं ने एक-दूसरे को सौभाग्यवती भव कहकर शुभकामनाएँ दीं और भारतीय परंपरा के इस अमूल्य उत्सव को आनंद और भक्ति के साथ मनाया।
करवा चौथ का यह पर्व केवल पति-पत्नी के रिश्ते का प्रतीक नहीं, बल्कि यह भारतीय समाज की उस गहरी संस्कृति का प्रतीक है जिसमें स्त्री अपने परिवार और जीवनसाथी के लिए समर्पित रहती है। इस अवसर पर मनीषा बत्रा ने अपने घर पर जिस श्रद्धा और पारंपरिक भाव से आयोजन किया, उसने यह संदेश दिया कि भारतीय नारी आज भी अपने संस्कारों से गहराई से जुड़ी हुई है।


