By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Godwin LiveGodwin LiveGodwin Live
  • देश
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • हरिद्वार
  • रूड़की
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • खेल जगत
  • धर्म-कर्म
  • Soni Ror Live
Reading: कांग्रेस बनाम RSS – विचारों का संघर्ष
Share
Sign In
Font ResizerAa
Godwin LiveGodwin Live
Font ResizerAa
  • व्यापार
  • राजनीति
  • Soni Ror Live
  • रूड़की
  • हरिद्वार
  • देश
  • देश
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • हरिद्वार
  • रूड़की
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • खेल जगत
  • धर्म-कर्म
  • Soni Ror Live
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Godwin Live > Blog > देश > कांग्रेस बनाम RSS – विचारों का संघर्ष
देश

कांग्रेस बनाम RSS – विचारों का संघर्ष

Soni Ror
Last updated: October 17, 2025 2:08 am
Soni Ror
Share
4 Min Read
SHARE

 “कर्नाटक से उठी बहस — आरएसएस की गतिविधियाँ और भारत का राजनीतिक परिदृश्य”

Contents
 आरएसएस — एक संगठन, एक विचारधारा प्रतिबंधों का इतिहास🔹 राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रतीकात्मक संदेश आगे क्या?

कर्नाटक की सियासत इन दिनों एक नई बहस से गरमाई हुई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार ने संकेत दिए हैं कि राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों को सार्वजनिक स्थानों और सरकारी परिसरों में सीमित करने के लिए नियम बनाए जा सकते हैं।
राज्य के सूचना मंत्री प्रियांक खरगे, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र हैं, ने कहा —

“हम किसी संगठन को नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर जो चाहे वह नहीं कर सकता। सरकारी जगहों पर लाठी लेकर मार्च निकालना बंद होना चाहिए, अगर करना है तो अपने निजी स्थानों पर करें।”

यह बयान केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक इतिहास में RSS की भूमिका और उसके प्रभाव को लेकर एक पुरानी बहस को फिर से जीवित करता है।


 आरएसएस — एक संगठन, एक विचारधारा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में डॉ. हेडगेवार ने की थी, उद्देश्य था — समाज में संगठन, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना।
स्वतंत्रता के बाद से RSS ने स्वयं को एक सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी संगठन बताया, लेकिन उसके राजनीतिक प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता।
जनसंघ से लेकर भाजपा तक, RSS की वैचारिक धारा ने भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है।


 प्रतिबंधों का इतिहास

RSS पर अब तक तीन बार प्रतिबंध लग चुका है —

  1. 1948 में, महात्मा गांधी की हत्या के बाद।
  2. 1975 में, इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान।
  3. 1992 में, बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद अल्प अवधि के लिए।

हर बार प्रतिबंध के बावजूद RSS ने न केवल अपनी पकड़ बनाए रखी, बल्कि और अधिक संगठित होकर उभरा।
आज यह संगठन भारत का सबसे बड़ा स्वयंसेवी नेटवर्क माना जाता है, जो शिक्षा, सेवा, ग्रामीण विकास और सामाजिक कार्यों में सक्रिय है।


🔹 राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रतीकात्मक संदेश

कर्नाटक में RSS की गतिविधियों को सीमित करने की बात, राजनीतिक प्रतीकवाद से भी भरी है।
कांग्रेस और RSS के बीच विचारधारात्मक संघर्ष स्वतंत्रता के बाद से जारी है — एक ओर धर्मनिरपेक्ष समाजवाद की सोच, दूसरी ओर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की परिभाषा।
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे का जवाब भी इसी संघर्ष का हिस्सा है —

“RSS एक बड़ा पेड़ है, जिसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। कांग्रेस शुरू से ही इसे रोकने की कोशिश करती आई है, लेकिन न कभी रोक पाई, न रोक पाएगी।”


 आगे क्या?

कर्नाटक सरकार का प्रस्ताव केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि यह सवाल उठाता है कि
क्या सरकारें विचारधाराओं पर रोक लगा सकती हैं?
क्या किसी संगठन की गतिविधि को उसकी राजनीतिक छाया के आधार पर नियंत्रित किया जाना चाहिए, या लोकतंत्र में हर विचारधारा को समान स्थान मिलना चाहिए?

RSS केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचार का प्रतीक है — जो समर्थक और विरोधी, दोनों को एक सदी से प्रभावित करता आया है।
इसे सीमित करना, दरअसल भारत के वैचारिक ताने-बाने को चुनौती देना भी है.

कर्नाटक में जो बहस शुरू हुई है, वह शायद आने वाले वर्षों में देश के कई राज्यों में गूंजेगी।
क्योंकि सवाल केवल RSS या कांग्रेस का नहीं,
बल्कि लोकतंत्र में विचार की आज़ादी बनाम प्रशासनिक नियंत्रण का है।

भारत की धरती पर विचारों को रोका नहीं जा सकता,
वे प्रतिबंधों के बीच भी पनपते हैं —
और शायद यही इस राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है।


क्या आप चाहें तो मैं इस लेख को अखबार में छपने योग्य फॉर्मेट (जैसे राष्ट्रवाद बनाम प्रशासनिक नियंत्रण : कर्नाटक की नई बहस) शीर्षक के साथ एडिटोरियल कॉलम शैली में व्यवस्थित कर दूँ?

You Might Also Like

चार शादियों के मामले में यूट्यूबर अरमान मलिक को अदालत का समन

“इश्क, शादी, सियासत और तलाक – दीपक हुड्डा और स्वीटी बूरा की टूटती कहानी!”

औरैया में मेरठ जैसा कांड: शादी के 15 दिन बाद पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर कर दी पति की हत्या

ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा बने भारतीय सेना में,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दी उपाधि

“एक दुल्हन से वादा, दूसरी से फेरे – गोरखपुर में शादी का दोहरा खेल!”

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और गन्ना आयुक्त पहुंचे धरना स्थल — 25 अक्टूबर तक स्थगित हुआ किसानों का आंदोलन
Next Article मुंबई में पकड़ा गया 30 साल से फर्जी दस्तावेजों से रह रहा बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर ‘गुरु मां’
Leave a Comment Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recipe Rating




Stay Connected

235.3kFollowersLike
69.1kFollowersFollow
11.6kFollowersPin
56.4kFollowersFollow
136kSubscribersSubscribe
4.4kFollowersFollow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

लक्सर में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई, 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते सहायक कृषि अधिकारी गिरफ्तार
रूड़की August 18, 2026
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सीएम धामी ने विभाजन पीड़ितों को किया नमन
रूड़की August 14, 2026
कांवड़ यात्रा में ट्रैफिक मैनेजमेंट की मिसाल, बिपेंद्र सिंह के अनुभव ने निभाई अहम भूमिका
उत्तराखंड August 14, 2026
पुरानी रंजिश और कारोबार में मुखबिरी को लेकर हत्या का आरोप, बाइक से बांधकर गंगा में फेंका शव; लक्सर पुलिस ने चार आरोपियों को दबोचा
रूड़की August 12, 2026
//

We influence 20 million users and is the number one business and technology news network on the planet

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Godwin LiveGodwin Live
Follow US
© 2024 Godwin Live. All Rights Reserved. | Website Design By Rantox Digital
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?