रुड़की।सोनी रोड़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों के अंतर्गत विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबद्ध आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर, रुड़की के केशव भवन सभागार में आयोजित ‘सप्तशक्ति संगम’ श्रृंखला का तृतीय मातृ सम्मेलन सादगी व गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में उपस्थित मातृशक्ति ने समाज और राष्ट्र में हो रहे परिवर्तनों तथा उनके प्रभावों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी एवं नवरचना पब्लिक स्कूल की निर्देशिका डॉ. शालिनी पंत रहीं। अध्यक्षता समाजसेवी श्रीमती रीमा बंसल ने की तथा संयोजन डॉ. भावना शर्मा द्वारा एवं संचालन श्रीमती ऋतु शर्मा ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मातृशक्ति द्वारा भारत माता और मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन से हुआ। छात्राओं ने “हम ही मातृशक्ति हैं, हम ही आदि शक्ति हैं” गीत प्रस्तुत कर वातावरण को उर्जावान बनाया।
सांसद कल्पना सैनी ने अपने संबोधन में नारी की नौ शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटी की प्रथम गुरु उसकी मां होती है, जो जीवन के हर पड़ाव पर उसे दिशा देती है। उन्होंने बताया कि बालिका राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और नारी की वाणी, व्यवहार तथा स्नेह परिवार को एकसूत्र में बांधे रखता है।
डॉ. शालिनी पंत ने कुटुंब प्रबोधन पर बोलते हुए कहा कि बेटियाँ समाज की आधारशिला हैं—उन्हें कोख में मत मारो। उन्होंने भारतीय परिवार प्रणाली की संरचना, पीढ़ीगत एकता और कर्तव्य भावना को सर्वोपरि बताते हुए पर्यावरण संरक्षण की अनिवार्यता पर भी प्रकाश डाला। कहा—“पर्यावरण का विनाश, मानवता का विनाश है। इसका संरक्षण हर नागरिक का उत्तरदायित्व है।”
कार्यक्रम संयोजिका डॉ. भावना शर्मा ने परिवार प्रबोधन के पाँच आयामों—भवन, भजन, भाषा, भूषा, भोजन व भ्रमण—पर विस्तार से जानकारी दी और कहा कि आज समाज को इन्हीं मूल्यों पर कार्य करने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में ‘परिवार कुटुंब प्रबोधन’ में उत्कृष्ट योगदान देने वाली पांच महिलाओं—विमला शर्मा, शीला देवी, ललिता, राजबाला देवी और सुनीता पंवार—का सम्मान किया गया।
विद्यालय की संगीत आचार्या नेहा चड्डा और सोनू शाक्य के निर्देशन में छात्राओं ने मनमोहक गीत प्रस्तुत किए। इसके साथ ही भूमिका, सोनाक्षी, अविका, आराध्या, श्रद्धा शर्मा आदि छात्राओं ने डॉ. आनंदीबाई जोशी, नीरजा भनोट, सुषमा स्वराज, मैरी कॉम और सुधा मूर्ति जैसी प्रेरणादायी महिलाओं की भूमिकाएँ निभाकर समाज को संदेश दिया कि नारी शक्ति किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़कर अपना स्थान बना सकती है।
कार्यक्रम में शिक्षिकाएँ भारती, नीला, सोनिया, अंजू, निशु सहित अन्य का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।


