रुड़की।सोनी रोड़।पांच दिवसीय बैंकिंग कार्य सप्ताह और समान रूप से परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) लागू करने की मांग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर गुरुवार को बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सिविल लाइंस शाखा के बाहर आयोजित प्रदर्शन में रुड़की क्षेत्र के विभिन्न बैंकों से जुड़े 250 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने में अब और देरी नहीं करने की मांग की। UFBU नेताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में हुए बैंक समझौते के दौरान इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और सरकार की ओर से पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू करने पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद मांग अभी तक लागू नहीं हुई है।
नेताओं ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में लगातार बढ़ते कार्यभार, स्टाफ की कमी, डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, सरकारी योजनाओं, ऋण, वसूली और लक्ष्य आधारित कार्यों के कारण कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह से कर्मचारियों को पर्याप्त विश्राम और परिवार के लिए समय मिलेगा तथा वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होगा।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को समान रूप से लागू करने की भी मांग उठाई। UFBU नेताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों में सुधार से उनकी कार्यक्षमता और बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में भी वृद्धि होगी।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
UFBU नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन के अनुसार 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का आह्वान किया गया है। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
प्रदर्शन में UFBU रुड़की इकाई के संयोजक एवं केनरा बैंक एम्पलाइज यूनियन के राज्य सचिव मन्नू माकिन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के उप महासचिव विशाल गुप्ता, पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन उत्तराखंड के महासचिव शशांक भारद्वाज समेत विभिन्न बैंक यूनियनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
मन्नू माकिन और शशांक भारद्वाज ने कहा कि UFBU बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से समस्याओं के समाधान के पक्ष में है, लेकिन लंबे समय से लंबित जायज मांगों की अनदेखी जारी रही तो बैंक कर्मचारी आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।


