लक्सर (हरिद्वार), 14 मई 2025 — उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद स्थित लक्सर के डोसनी गांव से एक बड़ा देशद्रोह का मामला सामने आया है। गांव का रहने वाला रकीब, जो पेशे से दर्जी है, दरअसल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) का जासूस निकला। उस पर बठिंडा स्थित सैन्य छावनी की जासूसी कर गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान भेजने का गंभीर आरोप है। मामले की जांच अब केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के हाथ में है और रकीब के पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
बताया जा रहा है कि रकीब दर्जी के पेशे की आड़ में सैनिक गतिविधियों की जासूसी करता था और मोबाइल एप्स व इंटरनेट के माध्यम से संवेदनशील सूचनाएं पाकिस्तान भेजता था। उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे, इसका भी पता लगाया जा रहा है।
परिवार के तीन लोग हिरासत में, बैंक खातों की जांच जारी
लक्सर पुलिस ने रकीब के परिवार के तीन सदस्यों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। रकीब के बैंक खातों और लेन-देन की जांच भी शुरू कर दी गई है। गांव वालों के अनुसार रकीब अक्सर महंगी गाड़ियां लेकर गांव आता था, जिससे लोगों को उसकी आमदनी पर शक होता था।
चौंकाने वाली बात यह है कि रकीब का चचेरा भाई रायवाला छावनी में दर्जी का काम करता है, उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। पूरा परिवार दर्जी के काम से जुड़ा है लेकिन अब इस गद्दारी के खुलासे से गांव के लोग शर्मिंदा हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, प्रशासन अलर्ट पर
एसएसपी हरिद्वार ने कहा कि किसी भी राज्य की पुलिस या केंद्रीय एजेंसी को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। दुश्मन देश को गोपनीय जानकारी देना गंभीर अपराध है और इसकी सख्त जांच की जा रही है।
इस घटना ने उत्तराखंड में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इससे पहले भी राज्य में पाकिस्तानी एजेंसी के लिए काम करने वाले कई एजेंट पकड़े जा चुके हैं:
- 2018 में पिथौरागढ़ से रमेश गिरफ्तार
- 2022 में रुड़की के कृष्ण नगर से प्रदीप को हनी ट्रैप मामले में जयपुर इंटेलिजेंस ने पकड़ा
- 2016 में रुड़की से चार संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार
- 2001 में नकली नोटों के मामले से जांच एजेंसियों का ध्यान रुड़की की तरफ गया
- बम धमाकों में तुषार दीवान की मौत भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला रही
जांच एजेंसियों की नजर उत्तराखंड पर
उत्तराखंड का सीमावर्ती और धार्मिक स्वरूप होने के कारण यह क्षेत्र हमेशा से जासूसी और आतंकी गतिविधियों के लिए संवेदनशील रहा है। खुफिया एजेंसियां लगातार ऐसे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी हैं। रकीब की गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर चौकसी जरूरी है।


