रुड़की, 29 जून 2025 — एक बार फिर रुड़की शहर सुर्खियों में है, और इस बार कारण बना है नकली दवाइयों का धंधा। पहले नकली पनीर, फिर नकली नोट और अब दवाइयों की फर्जी फैक्ट्री — लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या रुड़की धीरे-धीरे नकली चीज़ों का गढ़ बनता जा रहा है?
शनिवार को उत्तराखंड औषधि प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने रुड़की के मकतूलपुर, अंबर तालाब और रामनगर क्षेत्र में छापेमारी कर नकली दवाएं बनाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया। मौके से भारी मात्रा में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर तैयार नकली दवाएं, कच्चा माल और दवा के रैपर बरामद किए गए। गिरोह की करतूत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनके पास दवा बनाने का कोई लाइसेंस नहीं था, फिर भी लाखों की दवाएं तैयार की जा रही थीं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नरेश धीमान और योगेश गुलाटी के रूप में हुई है, जबकि एक आरोपी मौके से फरार हो गया। जांच में खुलासा हुआ कि ये गिरोह उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी सक्रिय था और कई जगह पहले से वांछित भी हैं।
छापेमारी के दौरान कैडिला, सन फार्मा, और इंटास जैसी नामी कंपनियों के नकली टैबलेट्स, पेन किलर्स, पैरासिटामोल और शुगर की दवाएं बरामद की गईं। कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इन दवाओं को असली मानने से इनकार कर दिया।
इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को चौकन्ना कर दिया है, बल्कि आम नागरिकों की चिंता भी बढ़ा दी है। पहले नकली खाने-पीने की चीज़ें और अब जीवनरक्षक दवाइयों में मिलावट — यह न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। फिलहाल जब्त दवाओं को सील कर जांच के लिए भेज दिया गया है और पूरे गिरोह की तह तक पहुंचने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।


