आईआईटी रुड़की, उत्तराखंड | 28 जनवरी 2026
“आईआईटी रुड़की”, में आयोजित विरासत महोत्सव 2026 का समापन दीक्षांत सभागार में एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं भावनात्मक रूप से समृद्ध समारोह के साथ हुआ। “एसपीआईसी मैके”, आईआईटी रुड़की चैप्टर द्वारा आयोजित इस महोत्सव में पाँच संस्थानों के छात्र-छात्राओं, संकाय सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों, एसपीआईसी मैके से जुड़े प्रतिनिधियों तथा संस्थान के वरिष्ठ नेतृत्व की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
समापन संध्या में प्रसिद्ध कव्वाल “रामपुर वारसी” की भव्य कव्वाली प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने भारत की समन्वयात्मक सांस्कृतिक परंपराओं को सजीव रूप में प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि शास्त्रीय एवं सूफी कलाएँ मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संतुलन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आईआईटी रुड़की के निदेशक ,”प्रो. कमल किशोर पंत”,” ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बौद्धिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के समन्वय पर बल देती है। विरासत जैसे आयोजन विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध कलात्मक परंपराओं से जोड़ते हुए उनकी रचनात्मकता, संवेदनशीलता और सभ्यतागत चेतना को सुदृढ़ करते हैं।
वहीं, उप निदेशक ,”प्रो. यू. पी. सिंह ने कहा कि एसपीआईसी मैके जैसे मंच युवाओं को आधुनिक शैक्षणिक परिवेश में भारतीय शास्त्रीय और लोक कलाओं की प्रासंगिकता से परिचित कराते हैं। ऐसे कार्यक्रम छात्रों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ हमारी जीवंत सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
पूरे आयोजन के दौरान विरासत 2026 के अंतर्गत भारतीय शास्त्रीय नृत्य, हिंदुस्तानी गायन, गुरबानी, शिल्प तथा सिनेमा से जुड़ी प्रस्तुतियाँ, कार्यशालाएँ और प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं। इन गतिविधियों ने संस्कृति और सृजनात्मकता को परिसर जीवन का अभिन्न अंग बनाने के उद्देश्य को मजबूती प्रदान की।
सफल आयोजन और उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ, विरासत 2026 ने यह एक बार फिर सिद्ध किया कि आईआईटी रुड़की न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और भावनात्मक कल्याण के संवर्धन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
आईआईटी रुड़की में विरासत-2026 का समापन, कव्वाली ने बांधा समां

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