देहरादून/रुद्रपुर।
उत्तराखंड में सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेशभर में व्यापक अभियान तेज कर दिया है। रुद्रपुर के गूलरभोज–हरिपुर जलाशय प्रकरण के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। प्रशासन ने सिंचाई विभाग की भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
उधम सिंह नगर जनपद के गदरपुर क्षेत्र स्थित हरिपुर जलाशय के पास 2.45 हेक्टेयर सिंचाई विभाग की जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण किया गया था। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण का चिन्हीकरण किया और 60 लोगों को नोटिस जारी किए। इस दौरान चार धार्मिक ढांचे भी अवैध रूप से बने पाए गए, जिन्हें भी नोटिस दिए गए हैं। प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को 15 दिन के भीतर स्वयं कब्जा हटाने का समय दिया है, इसके बाद बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी।
एडीएम कौस्तुभ मिश्रा ने बताया कि अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। जो लोग सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
प्रदेश सरकार की यह कार्रवाई सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। राज्य के अन्य जिलों में भी सरकारी भूमि, जलाशयों, नहरों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर बने अवैध ढांचों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी धर्म या वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून के तहत अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए की जा रही है।
हालांकि, कई मामलों में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि धार्मिक आस्था की आड़ में वर्षों से सरकारी जमीन पर कब्जे कैसे पनपते रहे और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जानकारों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण और जमीन माफियाओं की सक्रियता के चलते ऐसे अवैध निर्माण खड़े होते रहे, जिन्हें हटाना आज एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन चुका है।
फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में जहां-जहां सरकारी जमीन पर अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां बिना भेदभाव कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


