रुड़की। सोनी रोड़।
शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हर नुक्कड़ और गली में झुंड के रूप में घूमते ये कुत्ते अब लोगों की जान के लिए खतरा बन चुके हैं। ताजा मामला रुड़की का है, जहां 7 साल के बच्चे के साथ उसकी मां पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। मां अपने बेटे को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी, तभी अचानक एक कुत्ते ने उन पर झपट्टा मारा। बच्चे को बचाने के प्रयास में महिला भी घायल हो गई। दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि रुड़की सिविल अस्पताल में पिछले 23 दिनों से एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। 22 अक्टूबर के बाद से किसी भी मरीज को यह टीका नहीं लगाया गया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि “ऊपर से स्टॉक नहीं आया”, जबकि इमरजेंसी मरीजों को भी अब निजी दवा दुकानों से इंजेक्शन खरीदकर लगवाना पड़ रहा है।
शहर के लोगों का कहना है कि अस्पताल में तो सिर्फ “रिबन कटिंग” और “राजनीतिक फोटो सेशन” होते हैं। कभी विधायक और पार्टी पदाधिकारी रिबन काटने आते हैं, तो कभी मरीजों के बीच नारेबाजी और डीजे बजाकर माहौल बिगाड़ देते हैं। वहीं, सीएमओ की कुर्सी को लेकर भी विभाग में आपसी खींचतान की चर्चा जोरों पर है।
शहर में आवारा कुत्तों को नियंत्रण में रखने के लिए एबीसी (Animal Birth Control) सेंटर की भी शुरुआत की गई थी, लेकिन उसका असर कहीं नजर नहीं आ रहा। कुछ समय पहले कुत्तों को पकड़ने का वीडियो वायरल हुआ था, मगर उसके बाद कोई रिपोर्ट या अपडेट सामने नहीं आई।
शहर में कई परिवार ऐसे हैं जो अपने घरों के बाहर कुत्तों को रोज खाना खिलाते हैं, लेकिन उनकी लापरवाही अब दूसरों के लिए खतरा बनती जा रही है। डॉग लवर्स और पीड़ितों के बीच अब संघर्ष की स्थिति है।
अब सवाल यह है कि जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली, प्रशासन की अनदेखी और राजनीतिक दिखावे के बीच जनता डर और दर्द दोनों झेल रही है। सरकार भले ही स्वास्थ्य सुधार की बात करे, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि न दवा है, न व्यवस्था सिर्फ बयानबाजी और अफरातफरी।


