दीपावली के पावन पर्व के समापन के साथ ही आता है भैया दूज — वह त्योहार जो भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की उस आत्मा को दर्शाता है जहाँ संबंध केवल खून के नहीं, बल्कि संस्कारों, प्रेम और जिम्मेदारी के बंधन से जुड़े होते हैं।
सनातन परंपरा के अनुसार, इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक करती है, उसके मंगलमय जीवन की प्रार्थना करती है, और भाई अपनी बहन को यह विश्वास दिलाता है कि वह जीवनभर उसकी रक्षा और सम्मान का वचन निभाएगा। यह त्योहार हमें यह याद दिलाता है कि रिश्ते केवल शब्दों से नहीं, बल्कि भावना और कर्तव्य से जीवित रहते हैं।
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता रश्मि चौधरी ने इस अवसर पर सभी उत्तराखंड वासियों को भैया दूज की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा —
> “भैया दूज का यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहराई देता है। हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहाँ हर त्योहार रिश्तों में प्रेम, आदर और जिम्मेदारी की भावना जगाता है। इस परंपरा को हमें आगे बढ़ाना है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी भारतीय मूल्यों से जुड़ी रहें।”
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय समाज में त्योहार केवल उत्सव नहीं होते, बल्कि ये जीवन जीने की एक संवेदनशील पद्धति हैं। दीपावली, गोवर्धन पूजा या भैया दूज — हर त्योहार हमें अपने परिवार, अपने रिश्तों और अपने मूल संस्कारों से जोड़ता है।
आज जब आधुनिकता की तेज़ रफ्तार में रिश्ते औपचारिक होते जा रहे हैं, ऐसे समय में भैया दूज जैसे त्योहार हमें रुककर यह सोचने का अवसर देते हैं कि हमारे जीवन की असली पूँजी क्या है —
वह प्रेम जो बहन की दुआओं में है,
वह विश्वास जो भाई की प्रतिज्ञा में है।


