HIV से तबाही का खतरा! इंटरनेशनल फंडिंग में कटौती के चलते अगले 5 साल में 30 लाख मौतों की आशंका
नई दिल्ली: हाल ही में प्रकाशित लेसेंट की एक स्टडी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में भारी कटौती के कारण आने वाले पांच वर्षों में एचआईवी (HIV) महामारी विकराल रूप ले सकती है। यदि हालात नहीं सुधरे, तो 2030 तक दुनिया भर में 30 लाख लोगों की मौत हो सकती है।
फंडिंग में कटौती से इलाज और रोकथाम पर असर
लेसेंट की रिपोर्ट में बताया गया है कि एचआईवी की रोकथाम और उपचार के लिए मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी गिरावट आई है। इससे गरीब और विकासशील देशों में एचआईवी के खिलाफ चल रहे अभियान कमजोर पड़ सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, लाखों लोगों को जीवनरक्षक दवाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर नहीं मिल पाएंगी।
सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे अफ्रीका और एशिया के देश
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र अफ्रीका और एशिया के गरीब देश होंगे, जहां पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। इन देशों में एड्स से होने वाली मौतों की संख्या तेजी से बढ़ने की आशंका है।
संभावित समाधान और वैश्विक अपील
वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील कर रहे हैं कि वे इस संकट को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाएं। वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों का मानना है कि यदि फंडिंग में सुधार नहीं हुआ, तो यह महामारी एक बार फिर नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
एचआईवी के खिलाफ वर्षों की मेहनत और जागरूकता अभियान अब खतरे में हैं। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो यह महामारी अगले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों की जान ले सकती है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।


