बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, राजनीतिक गलियारों में हलचल और रणनीतियों की सरगर्मी तेज होती जा रही है। चुनाव से जुड़ी छुपी हुई खबरें और अंदर की बातें अब धीरे-धीरे उभर रही हैं, जो बिहार की जनता और राजनीतिक दलों के लिए कई संकेत देती हैं।
इस बार का चुनाव महज सत्ता की लड़ाई नहीं है, बल्कि जनता के मन की ताकत और गठबंधन की मजबूती की परीक्षा भी है। एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबला कड़ा होने वाला है। एनडीए की रणनीति पर हर समय निगाहें हैं, वहीं विपक्ष की रणनीति — जिसमें कांग्रेस, आरजेडी और अन्य दल शामिल हैं — भी लगातार चर्चा में है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस चुनाव में चुनौतियां कई हैं:
1. गठबंधन की मजबूती: महागठबंधन में दलों के बीच सीटों और उम्मीदवारों के बंटवारे पर संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
2. जनता का मूड: मतदाता का रुझान पिछले चुनावों की तुलना में इस बार अस्थिर और विचलित दिख रहा है। युवा वोटरों और पहली बार वोट देने वालों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
3. छिपी हुई राजनीति: सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के भीतर छुपे एजेंडे और असंतोष चुनाव परिणाम पर असर डाल सकते हैं।
4. मीडिया और सोशल मीडिया का प्रभाव: खबरों, पोस्टरों और ट्रेंडिंग विषयों के माध्यम से जनता की राय तेजी से बदल सकती है।
बिहार की जनता अब सिर्फ नाम और पार्टी के आधार पर नहीं बल्कि नीतियों, योजनाओं और नेताओं की साख के आधार पर वोट करने जा रही है। इस चुनाव में किसकी किस्मत जागेगी और किसका जादू चलेगा, यह तय करना आसान नहीं है। केवल इतना स्पष्ट है कि जनता की आवाज अंतिम निर्णायक होगी।


