सोनी रोड़
उत्तराखंड के पंचायत चुनावों के बीच एक प्रेरणादायक और अनोखी कहानी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जहां आमतौर पर लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर भागते हैं, वहीं देश की सेवा कर चुके दो अफसर – रिटायर्ड कर्नल यशपाल नेगी और रिटायर्ड आईजी विमल गुंजल – ने शहरों की चमक-धमक छोड़ अपने गांव की कमान संभालने का निर्णय लिया है।
इन दोनों दिग्गजों ने अपने जीवन के ऊंचे पदों पर रहते हुए जो अनुभव और नेतृत्व सीखा, अब उसी को गांव की सेवा में लगाने का संकल्प लिया है। खास बात यह रही कि जब इन्होंने प्रधानी के लिए नामांकन किया, तो पूरा गांव एकमत हो गया — किसी ने इनके सामने चुनाव लड़ने की हिम्मत तक नहीं की। नतीजतन, दोनों अफसरों को निर्विरोध प्रधान चुना गया।
कौन हैं ये दो प्रेरक चेहरे?
रिटायर्ड कर्नल यशपाल नेगी पौड़ी गढ़वाल जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के वीरगढ़ गांव से ताल्लुक रखते हैं। सेना में बड़े पद पर रहते हुए भी वे हमेशा अपने गांव और मिट्टी से जुड़े रहे। उनका मानना है कि जड़ों से जुड़ा रहना ही असली सेवा है।
रिटायर्ड आईजी विमल गुंजल पिथौरागढ़ जिले की विकासखंड गंगोलीहाट के गूंजा गांव से हैं। उन्होंने कहा — “जब गांव समर्थ होंगे, तभी राज्य समृद्ध बनेगा।” उनके इस कथन में उनके विजन और समाज के प्रति समर्पण की झलक साफ दिखाई देती है।
चुनावी माहौल और प्रेरणा
इन दोनों अफसरों की यह पहल तब सामने आई है जब राज्य के कई हिस्सों में पंचायत चुनावों को लेकर माहौल गर्म है। दीवारों पर पोस्टर, गलियों में ढोल-नगाड़े, और वोटरों को लुभाने की कोशिशें ज़ोरों पर हैं। लेकिन इस भीड़ और प्रचार के बीच, इन दो निर्विरोध चुने गए प्रधानों की सादगी, सोच और सेवा भावना एक मिसाल बन चुकी है।
क्यों है यह कहानी खास?
आज के दौर में जहां युवा नौकरी, शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, वहीं देश के लिए बड़ी जिम्मेदारियां निभा चुके ये दो अफसर अपने गांव लौटे हैं — नेतृत्व करने, सेवा करने और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने।
यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपने गांव, अपनी जड़ों और अपनी मिट्टी से जुड़ना चाहते हैं लेकिन हिचकिचाते हैं।


