सोनी रोड़ | रुड़की
त्योहारों का मौसम हो या सामान्य दिन, रुड़की का बाजार अब हर रोज़ एक नई चुनौती बनता जा रहा है। मुख्य बाज़ारों में लगातार बढ़ती भीड़, ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों का दबाव, तथा दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है।
हर मोड़ पर जाम, हर गली में अतिक्रमण
आर्य कन्या स्कूल के सामने की स्थिति तो सबसे बदतर हो चुकी है। सड़क पर एक तरफ दुकानें और दुकानों के आगे अस्थायी ठेले—जगह-जगह फैला अतिक्रमण लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। एसडी इंटर कॉलेज के पास तो स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि दोनों ओर से सड़क लगभग घिर चुकी है।
एक तरफ स्कूल प्रबंधन ने “पौधों की सजावट” के नाम पर सड़क का हिस्सा घेर रखा है, वहीं दूसरी ओर ट्रांसफार्मर और अवैध पार्किंग ने रास्ता पूरी तरह संकरा बना दिया है।
नेहरू स्टेडियम से में बाजार तक — बाजार में घुसना ही चुनौती
नेहरू स्टेडियम, जो बाजार में प्रवेश का मुख्य द्वार है, वहीं सबसे ज्यादा जाम की समस्या देखी जाती है। दुर्गा चौक से लेकर में बाजार तक दुकानदारों ने दुकानों के बाहर सामान फैला कर सड़क की चौड़ाई आधी कर दी है। नतीजा — एक ओर से रिक्शा निकलता है तो दूसरी ओर पैदल चलने वालों को दीवार से सटकर गुजरना पड़ता है।
व्यापारी खुश, लेकिन व्यवस्था ठप
त्योहारी रौनक से व्यापारी वर्ग तो प्रसन्न है, लेकिन ग्राहक असुविधा से परेशान हैं। सुरक्षा और सुविधा दोनों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? ट्रैफिक पुलिस और नगर प्रशासन बार-बार अभियान चलाने की बातें करते हैं, पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
अब वक्त है जागने का
जरूरत है कि स्थानीय प्रशासन, व्यापार मंडल और नागरिक मिलकर कोई ठोस योजना बनाएं —
दुकानों के बाहर फैले अतिक्रमण को हटाया जाए,
पार्किंग के लिए वैकल्पिक स्थान तय किए जाएं,
स्कूल और संस्थान अपने आस-पास की सड़क खुली रखें।
रुड़की की पहचान व्यापार और संस्कृति दोनों से है। इस पहचान को बनाए रखने के लिए व्यवस्था की सफाई और अनुशासन ज़रूरी है — वरना बाजार की रौनक एक दिन अफरातफरी में खो जाएगी।

