रुड़की। शहर में विकास के नाम पर चल रहे कथित निर्माण कार्यों की असलियत एक बार फिर सामने आ गई है। गणेशपुर इलाके के वार्ड नंबर-18 स्थित चौहान डेयरी वाली गली में बिना सड़क और नाली बनाए ही निर्माण पूरा होने का शिलापट लगा दिया गया। इस काम के आधार पर लाखों रुपये के भुगतान की तैयारी भी कर ली गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों की जागरूकता और मीडिया की पड़ताल से बड़ा घोटाला उजागर हो गया।
जानकारी के मुताबिक नगर निगम ने इस कार्य के लिए 2 अप्रैल 2025 को निविदा जारी की थी, जिसमें अनुमानित लागत करीब 22 लाख रुपये बताई गई थी। शिलापट में गली में पांच मीटर चौड़ाई की सड़क और सैकड़ों मीटर लंबाई में नाली निर्माण दर्शाया गया था, जबकि धरातल पर ऐसा कोई काम हुआ ही नहीं था।
स्थानीय नागरिकों ने जब गली में लगे शिलापट को लेकर सवाल उठाए, तो मामला सामने आया। इसके बाद खबर सुर्खियों में आने पर नगर निगम प्रशासन हरकत में आया है।
नगर आयुक्त राकेश तिवारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जेई, एई और ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिए हैं और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहर में विकास कार्यों की निगरानी कितनी प्रभावी है और क्या बिना जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की जानकारी के ऐसे शिलापट लगाए जा सकते हैं। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि इस मामले में आखिर जिम्मेदार कौन-कौन पाए जाते हैं।


