By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Godwin LiveGodwin LiveGodwin Live
  • देश
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • हरिद्वार
  • रूड़की
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • खेल जगत
  • धर्म-कर्म
  • Soni Ror Live
Reading: प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम : शिव मंदिरों का प्राकृतिक संसाधनों से अद्भुत संरेखण
Share
Sign In
Font ResizerAa
Godwin LiveGodwin Live
Font ResizerAa
  • व्यापार
  • राजनीति
  • Soni Ror Live
  • रूड़की
  • हरिद्वार
  • देश
  • देश
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • हरिद्वार
  • रूड़की
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • खेल जगत
  • धर्म-कर्म
  • Soni Ror Live
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Godwin Live > Blog > उत्तराखंड > प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम : शिव मंदिरों का प्राकृतिक संसाधनों से अद्भुत संरेखण
उत्तराखंडरूड़कीशिक्षा

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम : शिव मंदिरों का प्राकृतिक संसाधनों से अद्भुत संरेखण

theanupamsaini@gmail.com
Last updated: September 24, 2025 7:14 am
theanupamsaini@gmail.com
Share
2 Min Read
SHARE

रुड़की, सोनी रोड़

आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने एक ऐतिहासिक अध्ययन में खुलासा किया है कि भारत के आठ प्रमुख शिव मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर क्षेत्रों में भी स्थित हैं। यह शोध अमृता विश्व विद्यापीठम (भारत) और उप्साला विश्वविद्यालय (स्वीडन) के सहयोग से किया गया और ह्यूमैनिटीज़ एंड सोशल साइंसेज कम्युनिकेशंस (नेचर पोर्टफोलियो) में प्रकाशित हुआ है।

शोध में पाया गया कि उत्तराखंड के केदारनाथ से लेकर तमिलनाडु के रामेश्वरम तक फैले ये मंदिर 79° पूर्वी देशांतर रेखा पर केंद्रित एक संकरी पट्टी—शिव शक्ति अक्ष रेखा (SSAR)—पर स्थित हैं। उपग्रह डेटा और भू-स्थानिक मॉडलिंग से पता चला कि ये क्षेत्र जल, कृषि, पवन और सौर ऊर्जा की उच्च उत्पादकता वाले “हॉटस्पॉट” हैं।

अध्ययन के मुताबिक, एसएसएआर क्षेत्र भारत की कुल भूमि का महज 18.5% हिस्सा कवर करता है, लेकिन इसमें 44 मिलियन टन चावल उत्पादन और 597 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है—जो देश की वर्तमान स्थापित क्षमता से भी अधिक है।

आईआईटी रुड़की के प्रो. के.एस. काशीविश्वनाथन ने कहा, “यह शोध दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय सभ्यता प्रकृति और स्थायित्व की गहरी समझ रखती थी। मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं थे, बल्कि संसाधन नियोजन के भी प्रतीक थे।”

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि ये मंदिर पंचभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के प्रतीक हैं और प्राचीन काल में इन्हें भूमि, जल और ऊर्जा संसाधनों की गहन जानकारी के आधार पर चुना गया था।

प्रमुख लेखक श्री भाबेश दास के अनुसार, “प्राचीन मंदिर निर्माता आस्था के साथ-साथ पर्यावरण योजनाकार भी थे। उनके निर्णय अनुभवजन्य और व्यावहारिक ज्ञान पर आधारित थे।”

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, “यह शोध बताता है कि कैसे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान मिलकर सतत विकास के नए रास्ते खोल सकते हैं।”

यह अध्ययन भारत की सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक जलवायु चुनौतियों के बीच सेतु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

You Might Also Like

त्यौहार सादगी और संवेदनशीलता के साथ – सचिन गुप्ता और पूजा गुप्ता का अपनों के नाम संदेश

पारदर्शी प्रक्रिया पर राजनीति क्यों? SIR अभियान को लेकर देश में बढ़ा सियासी घमासान

थानो बना ‘लेखकों का तीर्थ’,देहरादून में बस रहा है भारत का पहला ‘लेखक गाँव’ 3 से 5 नवम्बर तक होगा ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव-2025’, दुनिया भर के लेखक होंगे शामिल

रुड़की: स्पा सेंटर पर छापेमारी, देह व्यापार का खुलासा – 4 महिलाएं और 1 पुरुष गिरफ्तार

भागीरथी कुंज में सड़कों के निर्माण कार्य का शुभारंभ, विधायक प्रदीप बत्रा ने किया फीता काटकर उद्घाटन

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.
By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article हरिद्वार विश्वविद्यालय में इंटरनल हैकथॉन का सफल आयोजन
Next Article एक दिवसीय फील्ड विजिट कार्यक्रम संपन्न
Leave a Comment Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recipe Rating




Stay Connected

235.3kFollowersLike
69.1kFollowersFollow
11.6kFollowersPin
56.4kFollowersFollow
136kSubscribersSubscribe
4.4kFollowersFollow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

COER University में द्वितीय दीक्षांत समारोह की धूम
रूड़की February 17, 2026
National Cadet Corps ग्रुप मुख्यालय रुड़की का भ्रमण
रूड़की February 17, 2026
रोशनाबाद में ‘अस्मिता रग्बी लीग नॉर्थ इंडिया’ का आगाज़, युवाओं में दिखा जोश
खेल जगत February 17, 2026
अभिव्यक्ति 2025’ में निखरी छात्राओं की रचनात्मक प्रतिभा
शिक्षा February 17, 2026
//

We influence 20 million users and is the number one business and technology news network on the planet

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Godwin LiveGodwin Live
Follow US
© 2024 Godwin Live. All Rights Reserved. | Website Design By Rantox Digital
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?