देहरादून।
उत्तराखंड की वादियों में साहित्य, संस्कृति और सृजनशीलता का नया तीर्थ आकार ले रहा है। देहरादून के थानो गांव में बसाया जा रहा “लेखक गाँव” अब न केवल राज्य, बल्कि पूरे देश का गौरव बन गया है। यह भारत का पहला लेखक गाँव है, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की परिकल्पना और अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रेरणा से साकार किया जा रहा है।
सृजन की नई धरती – लेखक गाँव

देहरादून के हरे-भरे जंगलों और हिमालय की गोद में बसा यह परिसर लेखकों, कवियों, कलाकारों और शोधकर्ताओं के लिए एक शांत और प्रेरणादायक स्थल बन चुका है। करीब कई बीघा क्षेत्र में फैले इस परिसर में 12 आकर्षक लेखक कुटीरें बनाई गई हैं, जिनमें आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक पहाड़ी स्थापत्य की झलक भी देखने को मिलती है।
यहां की प्राकृतिक शांति, हरियाली और हिमालय का अलौकिक सौंदर्य लेखन के लिए एक सजीव वातावरण प्रदान करता है।
‘स्पर्श हिमालय अभियान’ की प्रेरणा

‘लेखक गाँव’ केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक-सांस्कृतिक आंदोलन है। ‘स्पर्श हिमालय अभियान’ का उद्देश्य हिमालय की महानता, उसकी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं को विश्व स्तर पर प्रसारित करना है।
इस अभियान के माध्यम से ज्ञान, शोध, साहित्य, विज्ञान और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में हिमालय को विश्व कल्याण का केन्द्र बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
3 से 5 नवम्बर तक ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव’
इस परिसर में 3 से 5 नवम्बर 2025 तक ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम होगा —
जहाँ शब्द जीवंत होंगे, संवेदनाएँ आकार लेंगी और रचनात्मकता नई उड़ान भरेगी।
इस महोत्सव में देश-विदेश से प्रसिद्ध लेखक, कवि, विचारक और रचनाकार शामिल होंगे। साथ ही, उत्तराखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सुरक्षा सलाहकार सहित अनेक विशिष्ट अतिथि भी इस आयोजन में उपस्थित रहेंगे।
विश्व मानचित्र पर उत्तराखंड की नई पहचान
‘लेखक गाँव’ आज विश्व साहित्य जगत का आकर्षण केंद्र बन चुका है। यह केवल लेखन का स्थान नहीं, बल्कि “विचारों का तीर्थ” बन रहा है — जहाँ शब्दों से संस्कृति का निर्माण होता है और कलम से समाज की दिशा तय होती है।
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का कहना है कि,
“यह गाँव केवल लेखकों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। हिमालय की आत्मा और भारतीय संस्कृति की शक्ति को हम दुनिया के हर कोने तक पहुँचाएंगे।”


