एक बार की बात है, एक किसान अपने दो बैलों के साथ गाँव से शहर की ओर जा रहा था। दोनों बैलों की पीठ पर सामान लदा था — एक के ऊपर रुई का बोरा और दूसरे के ऊपर नमक का बोरा। रास्ता लंबा था, धूप तेज थी और दोनों बैल धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहे थे।
चलते-चलते नमक वाले बैल ने आह भरते हुए कहा,
“भाई, आज तो मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक नहीं लग रही। पैरों में ताकत नहीं है। ज़रा मेहरबानी करके तू अपना रुई का बोरा मुझे दे दे और मेरा नमक वाला बोरा तू उठा ले। रुई हल्की है, तुझे ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी।”
रुई वाला बैल ज़रा अकड़ते हुए बोला,
“ना भाई, ऐसा तो मैं कभी नहीं करूँगा। तेरा वजन तू ही उठा। मैं क्यों अपने ऊपर ज़्यादा बोझ डालूँ?”
नमक वाला बैल बेबस होकर चुप रह गया। दोनों अपने-अपने बोरे लेकर आगे बढ़ते रहे।
लेकिन तभी आसमान में काले बादल घिर आए और देखते ही देखते तेज़ बारिश शुरू हो गई। रास्ता कीचड़ से भर गया। दोनों बैल भीगने लगे। कुछ ही देर में चमत्कार हुआ — नमक वाले बैल का बोरा धीरे-धीरे हल्का होने लगा, क्योंकि बारिश का पानी नमक को घोल कर बहा ले गया।
अब वह बैल बिल्कुल हल्के बोरे के साथ चल रहा था, मानो उसकी थकान ही उड़ गई हो।
वहीं दूसरी तरफ रुई वाला बैल मुश्किल में पड़ गया। बारिश के पानी से उसकी रुई भीगकर भारी पत्थर जैसी हो गई। अब उसके कदम लड़खड़ा रहे थे, सांसें फूल रही थीं और शरीर काँप रहा था।
नमक वाला बैल उसकी ओर देखकर बोला,
“भाई, देखा… आज वक्त ने करवट बदल ली। जो बोझ मुझे भारी लग रहा था, वही अब हल्का हो गया। और जो खुद को हल्का समझ रहा था, वही अब गिरने को तैयार है।”
रुई वाला बैल बस चुप रहा। उसे समझ आ गया कि जीवन में परिस्थितियाँ कभी एक-सी नहीं रहतीं।
कहानी की सीख (Moral):
जीवन में सुख-दुःख, ऊँच-नीच हर किसी के हिस्से में आते हैं।
इसलिए सुख के समय घमंड न करें और दुःख के समय धैर्य रखें।
दिल में हमेशा दया और मदद की भावना रखें,
क्योंकि समय बदलता है —
आज जो दूसरों की मदद करेगा, कल वही दूसरों से मदद पाएगा।
सोनी रोड़

