देहरादून।
स्पर्श गंगा दिवस–2025 के अवसर पर आज देहरादून के लेखक गाँव में स्पर्श गंगा फाउंडेशन एवं स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्पर्श गंगा महोत्सव–2025 में देशभर से पर्यावरण विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता, छात्र–छात्राएँ, गंगा प्रहरी और जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवक एकत्रित हुए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने गंगा संरक्षण को जन–आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्पर्श गंगा अभियान ने अपने आरंभ से ही शिक्षा, संवेदना और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर गंगा संरक्षण को समाज के हर वर्ग से जोड़ने का कार्य किया है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न सामाजिक मंचों के माध्यम से अभियान ने पर्यावरण चेतना को सुदृढ़ किया है और यह सिद्ध किया है कि जन–सहभागिता से ही स्थायी परिवर्तन संभव है।
वक्ताओं ने कहा कि गंगा संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व से गहराई से जुड़े विषय हैं। गंगा की अविरलता और निर्मलता केवल नीतियों या योजनाओं से नहीं, बल्कि अनुशासित आचरण, सामूहिक जिम्मेदारी और निरंतर प्रयासों से सुनिश्चित की जा सकती है।
महोत्सव के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे प्रकृति, जल और पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक आचरण का हिस्सा बनाएँगे और गंगा के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, संतुलित और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेंगे।


