चाणक्य की यह सीख आज भी प्रासंगिक है, लेकिन आधुनिक युद्ध सिर्फ सीमा पर नहीं लड़े जाते—वे बजट, संसाधन और समाज पर भी गहरे ज़ख्म छोड़ते हैं।
शांति की कीमत होती है, लेकिन युद्ध देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से दिवालिया बना देता है। Defense spending बढ़ता है, development रुकता है, और सबसे बड़ा नुकसान होता है आम जनता को।
America ने Middle East में $8 ट्रिलियन झोंके, लेकिन मिला क्या? सिर्फ कर्ज और chaos। Russia ने Ukraine में ताकत दिखाई, पर $54.88 बिलियन के हथियार गंवा दिए।
भारत जैसे developing देशों के लिए युद्ध कोई ताकत दिखाने का platform नहीं है, बल्कि एक आखिरी मजबूरी है। भारत का संयम, diplomacy पर विश्वास, और growth में investment—यही असली शक्ति है।
Real power is not just in fighting wars, but in preventing them.
शक्ति का मतलब सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि समझदारी, एकजुटता और स्थायी शांति भी है।
भारत को चाहिए वो ताकत जो बिना युद्ध लड़े दुश्मन को जवाब दे सके।


