कार्तिका चौधरी, पीएचडी स्कॉलर, आईआईटी जोधपुर
जीवन में कुछ पल ऐसे होते हैं जब अंधेरा हर ओर छा जाता है — उम्मीदें बिखर जाती हैं, हौसले थम जाते हैं और दिल में सिर्फ एक सन्नाटा रह जाता है। मेरे जीवन में भी ऐसा ही एक दौर आया जब मैंने अपने पिताजी को खो दिया। सब कुछ ठहर-सा गया था। लेकिन कहते हैं — हर अंधेरे के बाद एक उजाला जरूर आता है।
एक दिन यूँ ही मामा जी के व्हाट्सएप स्टेटस पर नज़र पड़ी “रोड़ गर्ल्स स्पोर्ट्स महाकुंभ 2026” की एक झलक थी। दिल में एक नई उम्मीद जगी। जब जानकारी ली, तो पता चला कि हमारे समाज में लड़कियों के लिए पहली बार इतनी बड़ी खेल प्रतियोगिता ( रेस प्रतियोगिता) का आयोजन होने जा रहा है जिसमें छोटी बच्चियों से लेकर युवतियाँ और शादीशुदा महिलाएँ तक रेस प्रतियोगिता में भाग ले सकती हैं।
यह सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि लड़कियों के आत्मविश्वास, सम्मान और सामाजिक जागरण का महाकुंभ है।
हमारे समाज की यह ऐतिहासिक पहल डॉ. देव (जो अमेरिका में रहकर भी अपनी जड़ों से जुड़े हैं) के प्रयासों से साकार हो रही है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो दूरी कभी मायने नहीं रखती।मै
आईआईटी जोधपुर की छात्रा हूँ वहाँ भी यह अनुभव होता है कि खेलों में लड़कियों की भागीदारी सीमित रहती है। अधिकतर स्थानों पर वे दर्शक बनकर रह जाती हैं। समाज, परिवार और कभी-कभी अपनी ही झिझक उन्हें पीछे खींच लेती है। लेकिन जब समाज खुद लड़कियों के लिए मंच तैयार करे, उन्हें प्रोत्साहित करे, तो बदलाव निश्चित है।
यह आयोजन लड़कियों को सिर्फ मैदान में नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आत्मविश्वासी बनने की प्रेरणा देगा।
अक्सर कहते हैं “बेटियाँ सब कुछ कर सकती हैं।”
लेकिन क्या हमने उन्हें वो अवसर दिए हैं, जिनसे वे अपनी क्षमता पहचान सकें? किताबें जरूरी हैं, पर स्वस्थ शरीर और सशक्त सोच भी उतनी ही जरूरी है।
यह महाकुंभ उसी दिशा में एक ठोस कदम है —
जहाँ खेल के माध्यम से बेटियों को नेतृत्व, अनुशासन, और टीमवर्क की भावना सिखाई जाएगी।
आज सोशल मीडिया का दौर है।
मैं हर उस लड़की से अपील करती हूँ जो सोशल मीडिया पर सक्रिय है
“अपने समाज की इस पहल को आगे बढ़ाइए। शेयर कीजिए, प्रेरित कीजिए, भाग लीजिए।” समाज की पहचान केवल बातों से नहीं, भागीदारी और प्रदर्शन से बनती है।
अगर हम इस आयोजन को सफल बनाएँगे, तो आने वाले वर्षों में स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हमारे समाज की लड़कियाँ खेलों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि बनेंगी।
एक नई शुरुआत – हम सबका संकल्प
मैं खुद इस आयोजन में भाग लेने जा रही हूँ —
क्योंकि यह सिर्फ खेल नहीं, आत्मविश्वास का उत्सव है।
यह हर उस लड़की की कहानी है जो अब तक सिर्फ दर्शक रही, लेकिन अब मैदान में उतरने को तैयार है।
आइए, मिलकर यह संकल्प लें —
कि हम अपने समाज की हर बेटी को अवसर देंगे, हर घर से एक प्रतिभा को बाहर लाएँगे, और “रोड़ गर्ल्स स्पोर्ट्स महाकुंभ 2026” को एक ऐसी प्रेरणा बनाएँगे,जिस पर आने वाली पीढ़ियाँ गर्व करेंगी


